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​क्या आप जानते हैं भारत सरकार सिक्कों का आकार छोटा क्यों करती जा रही है ?

दरअसल किसी भी सिक्के की दो वैल्यू होतीं हैं जिनमे एक को कहा जाता है सिक्के की ‘फेस वैल्यू’ और दूसरी वैल्यू होती है उसकी ‘मेटलिक वैल्यू ‘.
सिक्के की फेस वैल्यू

इस वैल्यू से मतलब उस सिक्के पर जितने रुपये लिखा होता है, वही उसकी फेस वैल्यू कहलाती है.
जैसे अगर किसी सिक्के पर 1 रुपया लिखा होता तो उसकी फेस वैल्यू 1 रुपया ही होती है.
सिक्के की मेटलिक वैल्यू

इसका मतलब है सिक्का जिस धातु से बना है अगर उस सिक्के को पिघला दिया जाये तो उस धातु की मार्किट वैल्यू कितनी होगी.
“अब आप यह बात आसानी से समझ सकते हैं कि सरकार सिक्कों को छोटा क्यों कर रही है.”

अगर मान लो कि किसी सुनार/व्यक्ति के पास 1 रुपये का ऐसा सिक्का है जिसे यदि पिघला दिया जाये और उस धातु को बाजार में 2 रुपये में बेच दिया जाये तो उसको 1रुपये का फायदा हो जायेगा.अब यदि सभी लोग सिक्का पिघलाकर बाजार में बेच देंगे तो सिक्के बाजार से गायब हो जायेंगे जो कि सरकार और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए बहुत ही घातक स्थिति होगी.
यही कारण है कि सरकार कोशिश करती है कि किसी भी सिक्के की मेटलिक वैल्यू उसकी फेस वैल्यू से कम ही रहे ताकि लोग सिक्के को पिघलाने की कोशिश ना करें क्योंकि ऐसा करने पर उन्हें घाटा उठाना पड़ेगा.जैसे अगर किसी ने 2 रुपये का सिक्का (फेस वैल्यू) पिघला दिया और उस धातु को बाजार में बेचने पर उसे सिर्फ 1 रूपया (मेटलिक वैल्यू) मिला तो उसको 1 रुपये का घाटा हो जायेगा.

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अतः बाजार में सिक्कों की उपलब्धता बनाये रखने के लिए सरकार हर साल सिक्के का आकार घटाती रहती है और उनको बनाने में सस्ती धातु का प्रयोग करती है.

नोट – भारत में सुनारों ने पुराने सिक्कों को पिघलाकर चांदी के गहनों में खूब इस्तेमाल किया था इसलिए आज ये सिक्के बाजार में नजर नही आते हैं. ख़बरों में ये बात भी सामने आई है कि भारत के पुराने सिक्के बांग्लादेश में तस्करी किये जाते हैं क्योंकि इस धातु से वहां पर ब्लेड” बनाये जाते हैं.

भारत ने 1857-58, 1943, 1985, 1997-2002 के दौरान सिक्कों का आयात किया था.
इस समय तक सिक्के ताम्र निकल के बनाये जाते थे.
लेकिन 2002 के बाद जब ताम्र निकल की कीमतों में वृद्धि हो गयी तो सिक्कों को बनाने की लागत भी बढ़ गई इस कारण सरकार को सिक्के बनाने के लिए “फेरिटिक स्टेनलेस स्टील” का प्रयोग करना पड़ा और वर्तमान में सिक्के इसी स्टील से बनाये जा रहे हैं.
फेरिटिक स्टेनलेस स्टील ” में 17% क्रोमियम और 83% लोहा होता है.

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