हर दिन की अहम खबरें, जनहित के मुद्दों और जरूरी अपडेट का सीधा रैबार। राज्य, नीति, विकास, प्रशासन, विकास, मौसम, स्वास्थ्य और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरें।
पहाड़ के गांवों, लोगों, रीति-रिवाजों और रोजमर्रा के जीवन से जुड़े किस्से-कहानियां..

पहाड़ी क्षेत्रों में अस्पतालों का अभाव: एक मौन संकट
पहाड़ में कई बार सबसे बड़ी चिंता बीमारी नहीं, बल्कि सही समय पर मदद तक पहुंच होती है। इस लेख के माध्यम से उन चुनौतियों, स्थानीय वास्तविकताओं और रोजमर्रा के संघर्ष को समझने की कोशिश की गई है, जो दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था को लोगों के जीवन से सीधे जोड़ती हैं।

दो दुनियाओं के बीच जीता पहाड़ी युवा
कई बार लौटना चाहने के बावजूद रास्ते आसान नहीं होते, और कई बार जाने के बाद भी पहाड़ पूरी तरह पीछे नहीं छूटता। इस लेख के माध्यम से उस भावनात्मक, सामाजिक और व्यावहारिक खींचतान को समझने की कोशिश की गई है, जिसके बीच आज का पहाड़ी युवा अपना भविष्य तलाश रहा है।

पहाड़ों में बदलती राहें: पलायन से संभावना तक
क्या आप जानते हैं, पहाड़ों की कहानी अब सिर्फ पलायन तक सीमित नहीं रही? ये लेख उन छोटे-छोटे बदलावों के बारे में है, जहाँ होमस्टे, खेती, इंटरनेट और नए प्रयोग कई गांवों में रुकने और लौटने की संभावना फिर से पैदा कर रहे हैं।

ऊपर चमकते हिमखंड, नीचे बहती ज़िंदगी
क्यों कुछ घर अब कम खुलते हैं, त्योहारों में आँगन पहले जैसे क्यों नहीं भरते और पहाड़ लौटने की इच्छा अक्सर सिर्फ एक उम्मीद बनकर क्यों रह जाती है – यह लेख पहाड़ से दूर होते जीवन, खाली होते घरों और उस रिश्ते के बारे में है जो दूर जाने के बाद भी पूरी तरह नहीं छूटता।
त्योहारों, स्थापत्य, परंपराओं, मंदिरों और धरोहरों में दिखती पहाड़ की सांस्कृतिक पहचान…
लोककथाओं, लोकनायकों, व्यक्तित्वों और पहाड़ की यादों से जुड़ी गढ़वाल-कुमाऊं की जीवंत कहानियां..

इंद्रमणि बडोनी: उत्तराखंड राज्य आंदोलन के जननायक और ‘पर्वतीय गांधी’
105 दिनों की ऐतिहासिक पदयात्रा, गैरसैंण को लेकर उनकी दूरदर्शी सोच और 1994 का आमरण अनशन उनके संघर्ष के अहम पड़ाव रहे। इन घटनाओं ने पहाड़ की राजनीति और जनभावनाओं पर क्या असर डाला? पूरी कहानी पढ़ें।
उत्तराखंड के जीवन, पहाड़ और समाज पर लेख और साफ संपादकीय नजरिया। विचार, अनुभव और संवेदना से जुड़ी हमारी बात!

शहर और गांव: एक जगह मौके ज्यादा हैं, दूसरी जगह लोग अपने लगते हैं
बेहतर जिंदगी केवल इस बात से तय नहीं होती कि आप शहर में रहते हैं या गांव में। असली सवाल यह है कि सुविधाएं, रोजगार, समय और अपनापन – इन चारों के बीच संतुलन कहां बन पाता है। यही सवाल इस लेख के केंद्र में है।

5 अगस्त 2025 की धराली आपदा: एक साल बाद भी सामान्य नहीं हुई जिंदगी
“धराली में अब नई सड़क है। कुछ दुकानें फिर खुल चुकी हैं। लेकिन बाज़ार में चलते हुए यह समझने में देर नहीं लगती कि निर्माण और पुनर्निर्माण एक ही बात नहीं हैं। सड़क बन सकती है, इमारतें भी दोबारा खड़ी हो सकती हैं, लेकिन जिन परिवारों का घर और रोज़गार एक साथ गया, उनके लिए लौटना कहीं लंबी प्रक्रिया है।”

सुबह सूरज से नहीं, मां से शुरू होती है
मां का प्यार अक्सर बड़े शब्दों में नहीं, बल्कि रोजमर्रा की छोटी-छोटी बातों में दिखाई देता है। यह लेख उसी अनकहे स्नेह, त्याग और उस खालीपन की कहानी है, जिसे केवल वही समझ सकता है जिसने मां का साथ महसूस किया हो। आगे पढ़िए…

जंगलों के बिना कैसा कल?
जंगलों की असली कीमत लकड़ी से नहीं, बल्कि उन अनदेखे रिश्तों से तय होती है जो पानी, मिट्टी, वन्यजीव और इंसानी जीवन को जोड़ते हैं। इस लेख के माध्यम से समझिए कि जंगलों का सवाल आखिर भविष्य का सवाल क्यों बनता जा रहा है।
पहाड़ की नई पीढ़ी के सपनों, संघर्षों, बदलती सोच और उपलब्धियों की झलक। उम्र से परे, हर सोच और हर प्रयास की प्रेरक कहानियां..

पारंपरिक मंडुवे से आधुनिक कारोबार: कल्पना बिष्ट ने गांव में तैयार किया रोजगार का नया मॉडल
उत्तराखंड के पारंपरिक मंडुवे की असली क्षमता केवल खेती तक सीमित नहीं है। सही प्रशिक्षण, बेहतर पैकेजिंग और बाजार से जुड़ने पर यही स्थानीय अनाज गांवों में रोजगार, महिला उद्यमिता और टिकाऊ आजीविका का मजबूत आधार बन सकता है। कल्पना बिष्ट की पहल इसी बदलाव की एक मिसाल है।

पिरूल से पहचान: द्वाराहाट की महिलाओं ने हस्तशिल्प के जरिए बनाया स्वरोजगार का रास्ता
पहाड़ों में रोजगार की कमी और पलायन के बीच यह पहल दिखाती है कि स्थानीय संसाधन भी आजीविका का मजबूत आधार बन सकते हैं। द्वाराहाट की महिलाओं ने जिस पिरूल को कभी बेकार समझा जाता था, उसी को हुनर और मेहनत से पहचान, आमदनी और दूसरी महिलाओं के लिए प्रेरणा में बदल दिया।

देहरादून का यह कपल अब 20 किमी दौड़कर दूसरों को कर रहा प्रेरित, 50 की उम्र के आसपास शुरू हुआ फिटनेस सफर
फिटनेस की शुरुआत हमेशा लंबी दौड़ से नहीं होती। कई बार छोटे-छोटे बदलाव और लगातार बनी रहने वाली आदतें ही समय के साथ बड़ा परिवर्तन लेकर आती हैं। इस सफर की सबसे बड़ी सीख क्या है, जानिए…

पहाड़ की ‘मशरूम लेडी’: दिव्या रावत ने मशरूम खेती से खोले रोजगार के नए रास्ते, पलायन रोकने की पहल
चमोली की दिव्या रावत ने मशरूम खेती के माध्यम से हजारों परिवारों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा किए और पहाड़ों में पलायन की समस्या के समाधान की दिशा में एक नई पहल की।
घूमने की जगहों, ट्रेक, हिमालयी पर्वतों, यात्रा अनुभवों और पर्यावरण से जुड़ी जानकारियां

क्या पहाड़ सच में शहरों से पीछे हैं? विकास को आखिर मापा कैसे जाता है?
रोजगार, अस्पताल और उच्च शिक्षा की कमी पहाड़ की वास्तविक चुनौतियां हैं, लेकिन विकास की पूरी तस्वीर केवल आय और सुविधाओं से नहीं बनती। जंगल, पानी, जैव विविधता और जीवन की गुणवत्ता जैसे सवाल भी सामने आते हैं – और यहीं से यह बहस बदलने लगती है कि आखिर किसे विकसित माना जाए।

बाँज के जंगल और पहाड़ी जलस्रोत: पर्यावरण का चक्र
पहाड़ में कई गाँव कभी धारा देखकर बसे थे। लेकिन क्या सच में बाँज के जंगल और पानी का रिश्ता उतना गहरा है, जितना पुराने लोग मानते रहे हैं? विज्ञान, अनुभव और पहाड़ की जमीन क्या कहती है, जानिए।

तिमला: पहाड़ का वह फल जो प्रकृति के सबसे अनोखे रहस्यों में से एक है
क्या सच में तिमला वह फल नहीं है, जैसा हम बचपन से समझते आए हैं? पहाड़ों में मिलने वाले इस आम दिखने वाले लाल फल के भीतर प्रकृति का ऐसा रहस्य छिपा है, जिसे जानने के बाद शायद आप अगली बार तिमला देखकर रुक जाएँ।

चौलाई: पहाड़ की वह फसल जो आज विदेशों में ‘सुपरफूड’ के नाम से बिक रही है
क्या सच में पहाड़ों के खेतों में उगने वाली एक साधारण फसल को दुनिया आज ‘सुपरफूड’ मान रही है? आखिर क्यों चौलाई, जिसे हिमालय के लोग पीढ़ियों से खाते आए हैं, अब विदेशों के महंगे सुपरमार्केट तक पहुँच चुकी है? यह लेख चौलाई की पोषण क्षमता, इतिहास और पहाड़ से उसके गहरे संबंध के बारे में है।

भोजपत्र: जिस पर कभी लिखे जाते थे शास्त्र, मंत्र और ग्रंथ
क्या सच में कभी किताबों और कागज़ की जगह पेड़ की छाल पर लिखा जाता था? हिमालय में उगने वाला भोजपत्र आखिर इतना खास क्यों था कि उस पर शास्त्र, मंत्र और ग्रंथ लिखे जाते थे — और क्या इसके निशान आज भी उत्तराखंड के पहाड़ों में मिलते हैं?
उत्तराखंड में सरकारी नौकरी, भर्ती, प्रतियोगी परीक्षाओं, रोजगार मेलों, स्वरोजगार और युवाओं से जुड़े अवसरों की ताज़ा एवं महत्वपूर्ण खबरें।









