₹1105 करोड़ का Rishikesh Bypass Project मंजूर, 3 साल में तैयार होगा 4- लेन मार्ग न बिजली, न मशीन-फिर भी सालों तक चलती रही ये जल-चलित चक्की 3,000 मीटर से ऊपर बर्फ पिघलते ही क्यों शुरू होती है कीड़ा जड़ी की तलाश, और कैसे उत्तराखंड के बुग्यालों में यह जड़ी जोखिम, आजीविका और वैश्विक बाजार को जोड़ती है यात्रियों के लिए विश्राम और सहारे के रूप में विकसित ये पारंपरिक पड़ाव सड़कों पर रेंगता शहर, क्या ट्रैफिक में फंसकर थम रही है देहरादून की रफ्तार एक जवान, एक पोस्ट और 72 घंटे की लड़ाई, शहादत के बाद भी मिलती हैं छुट्टी और प्रमोशन वह पहाड़ी खोजी, जिसने कदम गिनकर तिब्बत का नक्शा बना दिया ऐपण (अल्पना): आस्था, रेखाओं और परंपरा का जीवित स्वरूप ₹1105 करोड़ का Rishikesh Bypass Project मंजूर, 3 साल में तैयार होगा 4- लेन मार्ग न बिजली, न मशीन-फिर भी सालों तक चलती रही ये जल-चलित चक्की 3,000 मीटर से ऊपर बर्फ पिघलते ही क्यों शुरू होती है कीड़ा जड़ी की तलाश, और कैसे उत्तराखंड के बुग्यालों में यह जड़ी जोखिम, आजीविका और वैश्विक बाजार को जोड़ती है यात्रियों के लिए विश्राम और सहारे के रूप में विकसित ये पारंपरिक पड़ाव सड़कों पर रेंगता शहर, क्या ट्रैफिक में फंसकर थम रही है देहरादून की रफ्तार एक जवान, एक पोस्ट और 72 घंटे की लड़ाई, शहादत के बाद भी मिलती हैं छुट्टी और प्रमोशन वह पहाड़ी खोजी, जिसने कदम गिनकर तिब्बत का नक्शा बना दिया ऐपण (अल्पना): आस्था, रेखाओं और परंपरा का जीवित स्वरूप
चमोली की उद्यमी दिव्या रावत मशरूम उत्पादन केंद्र में

पहाड़ की ‘मशरूम लेडी’: दिव्या रावत ने मशरूम खेती से खोले रोजगार के नए रास्ते, पलायन रोकने की पहल

चमोली की दिव्या रावत ने मशरूम खेती के माध्यम से हजारों परिवारों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा किए और पहाड़ों में पलायन की समस्या के समाधान की दिशा में एक नई पहल की।

नमकवाली ब्रांड की संस्थापक शशि बहुगुणा रतूड़ी और स्थानीय महिलाएँ

पहाड़ की ‘नमकवाली’: ₹1,000 से शुरू हुआ सफर बना ₹5 करोड़ का कारोबार, शशि बहुगुणा रतूड़ी की प्रेरक कहानी

उत्तराखंड की उद्यमी शशि बहुगुणा रतूड़ी ने ₹1,000 से शुरू हुए पारंपरिक “पिस्यू लून” के छोटे व्यवसाय को आज करोड़ों के ब्रांड “नमकवाली” में बदल दिया है।

नैनीताल जिले के ओखलकांडा क्षेत्र में पौधरोपण के लिए पौधे तैयार करते चंदन नयाल

पहाड़ का “ट्री मैन”: चंदन नयाल ने 12 वर्षों में लगाए 80,000 से अधिक पेड़, जंगल और जल संरक्षण की अनोखी मिसाल

नैनीताल जिले के ओखलकांडा क्षेत्र के चंदन नयाल ने पिछले 12 वर्षों में 80,000 से अधिक पेड़ लगाकर और हजारों चाल-खाल बनाकर पहाड़ों में जल और जंगल संरक्षण की अनोखी मिसाल पेश की है।

बागेश्वर जिले के किसान जगदीश चंद्र कुणियाल पौधा लगाते हुए

बंजर ज़मीन से हरियाली तक: उत्तराखंड के 60 वर्षीय किसान ने लगाए एक लाख पेड़, बदल दी पूरे गांव की तस्वीर

बागेश्वर जिले के सिरकोट गांव के किसान जगदीश चंद्र कुणियाल ने चार दशकों में लगभग एक लाख पेड़ लगाकर बंजर जमीन को घने जंगल में बदल दिया और पूरे गांव की सोच बदल दी।

72 घंटे की लड़ाई से जुड़े जसवंत सिंह रावत का ऐतिहासिक चित्र

एक जवान, एक पोस्ट और 72 घंटे की लड़ाई, शहादत के बाद भी मिलती हैं छुट्टी और प्रमोशन

पौड़ी गढ़वाल के जसवंत सिंह रावत ने 1962 युद्ध में नूरानांग पोस्ट पर कैसे असाधारण साहस दिखाया और उनके नाम से जुड़ी परंपराएँ आज भी क्यों जीवित हैं।

उत्तराखंड के पहाड़ी गाँव में राशन की दुकान के बाहर खड़े ग्रामीण और भीतर बैठे दुकानदार का यथार्थ दृश्य

राशन की दुकान और उधार की कॉपी

एक पहाड़ी गाँव की वह छोटी-सी दुकान, जहाँ जरूरत के समय हिसाब से पहले भरोसा लिखा जाता था। वहाँ उधार केवल लेन-देन नहीं था, बल्कि सामाजिक संबंधों और आपसी उत्तरदायित्व की एक मौन परंपरा थी।

परीक्षा केंद्र के बाहर प्रवेश से पहले खड़े प्रतियोगी परीक्षा के अभ्यर्थी

पहाड़ का युवा और प्रतियोगी परीक्षाएँ : अवसर की डगर या दबाव का बोझ?

पहाड़ का युवा वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में समय, ऊर्जा और उम्मीद लगाता है। यह मार्ग कई बार अवसर का द्वार बनता है, तो कई बार अनिश्चितता और सामाजिक अपेक्षाओं का दबाव भी साथ लाता है।

हिमालय के ऊंचे इलाके में झुककर जमीन से कीड़ा जड़ी खोजते स्थानीय लोग

3,000 मीटर से ऊपर बर्फ पिघलते ही क्यों शुरू होती है कीड़ा जड़ी की तलाश, और कैसे उत्तराखंड के बुग्यालों में यह जड़ी जोखिम, आजीविका और वैश्विक बाजार को जोड़ती है

उत्तराखंड के ऊंचे इलाकों में हर साल कीड़ा जड़ी की तलाश के लिए लोग सीमित समय के लिए पहाड़ों में जाते हैं।
जानिए इसकी खोज, स्थानीय अधिकार, कमाई और उससे जुड़े जोखिमों की पूरी कहानी।

उत्तराखंड के चीड़ के जंगल में ढलान पर फैलती आग और धुआँ

जलते जंगलों के बीच खड़ा पहाड़, क्या धुएँ में घुल रही है हमारी पहाड़ी पहचान

जलते जंगलों के बीच खड़ा पहाड़ और धुएँ में घुलती पहाड़ी पहचान उत्तराखंड में वनाग्नि के बढ़ते संकट की ओर संकेत करती है। जानिए इसके कारण, प्रभाव और समाधान।

उत्तराखंड के हिमालय में स्थित नंदा देवी पर्वत शिखर

नंदा देवी शिखर पर चढ़ाई क्यों प्रतिबंधित है?

नंदा देवी भारत की दूसरी सबसे ऊँची चोटी है, लेकिन इसके मुख्य शिखर पर पर्वतारोहण प्रतिबंधित है। इसके पीछे पर्यावरण संरक्षण, ऐतिहासिक घटनाएँ और हिमालय की संवेदनशील पारिस्थितिकी जैसे कई कारण जुड़े हुए हैं।

उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित रूपकुंड झील

रूपकुंड: हिमालय की वह रहस्यमयी झील जहाँ मिले सैकड़ों मानव

चमोली जिले में स्थित रूपकुंड झील को “स्केलेटन लेक” के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यहाँ बर्फ पिघलने पर सैकड़ों मानव कंकाल दिखाई देते हैं। यह रहस्य आज भी वैज्ञानिकों और इतिहासकारों को आकर्षित करता है।

चोपता क्षेत्र में वसंत ऋतु में खिला हुआ बुराँश का वृक्ष

चोपता : खूबसूरत गुलाबी बुराँश का अद्भुत संसार

वसंत में जब चोपता के ढलानों पर बुराँश खिलता है, तो वह केवल जंगल को रंग नहीं देता;
वह उस हिमालयी संतुलन को उजागर करता है जिस पर यह पूरा पारिस्थितिक तंत्र टिका है।

उत्तराखंड के पहाड़ों में बहते पानी से चलती पारंपरिक घराट चक्की

न बिजली, न मशीन-फिर भी सालों तक चलती रही ये जल-चलित चक्की

उत्तराखंड के पहाड़ों में घराट (घट्ट) कैसे बहते पानी की शक्ति से अनाज पीसने का पारंपरिक और आत्मनिर्भर साधन बना, जानिए इसकी कार्यप्रणाली और महत्व।

पहाड़ों में रोजगार के नए अवसर दिखाता उत्तराखंड के पहाड़ी गांव में खेती, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन और होमस्टे गतिविधियाँ

पहाड़ों में रोजगार के नए अवसर

उत्तराखंड के पहाड़ी गांवों में पर्यटन, जैविक खेती और छोटे स्थानीय उद्यमों के माध्यम से रोजगार के नए अवसर उभर रहे हैं। जानिए कैसे बदलता दृष्टिकोण, होमस्टे, पारंपरिक अनाज और डिजिटल काम पहाड़ के युवाओं के लिए नई संभावनाएँ खोल रहे हैं।

उत्तराखंड की पहाड़ी ढलान पर पत्थर की मेड़ों से बने सीढ़ीदार खेत

सीढ़ीदार खेत : आख़िर इतनी खड़ी जगहों पर ये खेत किसने बनाए? कैसे बनाए?

मध्य हिमालय की ढलानों पर उकेरी गई ये सीढ़ियाँ केवल खेत नहीं हैं। वे उस सामूहिक श्रम और भूगोल की समझ का परिणाम हैं, जिसने खड़ी पहाड़ियों को जीवन-योग्य कृषि भूमि में बदला।