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जनरल बिपिन सिंह रावत को मिलेगा ‘परम वशिष्ठ सेवा पदक’

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बिपिन रावत का जन्म उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में हुआ था। उनका परिवार कई पीढ़ियों से भारतीय सेना में सेवाएं प्रदान कर रहा था और उनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल लक्ष्मण सिंह रावत (Lieutenant General Lakshman Singh Rawat) थे। रावत ने कैंब्रियन हॉलस्कूल, देहरादून ; सेंट एडवर्ड स्कूल शिमला, राष्ट्रीय रक्षा अकादमी खडकवासला और भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून में भाग लिया, जहां उन्हें ‘स्वॉर्ड ऑफ ऑनर’ से सम्मानित किया गया।

कौन-कौन सी डिग्रियां है जनरल के पास

वे अमेरिका के फोर्ट लीवेनवर्थ में डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन और हायर कमांड कोर्स में स्नातक भी हैं। उनके पास मद्रास विश्वविद्यालय से रक्षा अध्ययन में एक एमफिल, प्रबंधन और कंप्यूटर अध्ययन में डिप्लोमा भी है । 2011 में, उन्हें चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ द्वारा सैन्य-मीडिया रणनीतिक अध्ययन पर उनके शोध के लिए डॉक्टरेट ऑफ फिलॉसफी से सम्मानित किया गया।

कब बने General Bipin Singh Rawat
सेनाध्यक्ष (Army Chief)

रावत ने 1 जनवरी 2016 को GOC-in-C दक्षिणी कमान का पद संभाला और 1 सितंबर 2016 को सेनाध्यक्ष के पद का कार्यभार संभाला। 17 दिसंबर 2016 को, भारत सरकार ने उन्हें 27 वें सेना प्रमुख के रूप में नामित किया , दो और वरिष्ठ लेफ्टिनेंट जनरलों, प्रवीण बख्शी और पीएम हरिज़ को पीछे छोड़ते हुए। वे गोरखा ब्रिगेड से सेनाध्यक्ष बनने वाले चौथे अधिकारी हैं।

वे नेपाली सेनाओं के honorary जनरल भी हैं। भारतीय और नेपाली सेनाओं के बीच यह परंपरा रही है कि वे अपने करीबी और विशेष सैन्य संबंधों को दर्शाने के लिए एक-दूसरे के प्रमुखों को honorary शीर्ष रैंक प्रदान करते हैं।

सेना प्रमुख बिपिन रावत (फाइल पिक में) आज राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद से परम वशिष्ठ सेवा पदक प्राप्त करेंगे, उनके साथ सेना के सिपाही वर्मा पाल सिंह और सीआरपीएफ के जवान राजेंद्र नैन और रवींद्र बब्बन धनावड़े को मरणोपरांत कीर्ति चक्र दिया जाएगा।

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किसे मिलता है परम विशिष्ट सेवा पदक (Param Vishisht Seva Medal)?

परम विशिष्ट सेवा मेडल (पीवीएसएम) ,भारत का एक सैन्य पुरस्कार है। इसका गठन 1960 में किया गया था और तब से आज तक, यह शांति के लिए और सेवा क्षेत्र में सबसे असाधारण कार्य (मरणोपरांत भी ) सम्मानित किया जाता है।

किसे मिलता है कीर्ति चक्र?

कीर्ति चक्र भारत का शांति के समय वीरता का पदक है। यह सम्मान सैनिकों और असैनिकों को असाधारण वीरता या प्रकट शूरता या बलिदान के लिए दिया जाता है। यह मरणोपरान्त भी दिया जा सकता है। वरियता मे यह महावीर चक्र के बाद आता है।

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