कंपकपाती ठंड में बसें धोकर अकेले ही परिवार का पालन-पोषण करने वाली मीरा ने की देश के लिए मिसाल कायम

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भले ही आज समाज में नारी को पुरुषों के बराबर दर्जा देने की बात की जाती हो, लेकिन वास्तविकता यही है कि स्त्रियों को आज भी उपेक्षा की दृष्टि से देखा जाता है। समाज में कुछ महिलाएं ऐसी भी हैं जो अपने मजबूत इरादों से इस धारणा को तोड़ रहीं हैं और लोगों के लिए मिसाल कायम कर रही हैं।

ऐसी ही एक महिला हैं सिरमोर,हिमाचल की रहने वाली मीरा। पति की मृत्यु हो जाने के बाद अकेले ही परिवार का पालन-पोषण करने का बीड़ा मीरा ने उठाया। वो रोजाना ददाहू बस स्टैंड में 7 से 10 बसें धोकर परिवार का खर्चा चलाती है।

आपको बता दें कि मीरा के पति की मृत्यु अप्रैल 2015 में दिल का दौरे पड़ने से हो गई थी। पति की मृत्यु के बाद परिवार की का खर्चा चलाना मुश्किल हो गया था लेकिन मीरा ने हार नहीं मानी।

अब मीरा अपने तीन बच्चों और सास के साथ पनार में रह रही हैं। मीरा अपने बच्चों को कभी अपने पिता की कमी महसूस नहीं होने देती और सास का भी बेटा बनकर खूब खयाल रखती है।

जहां हम आजकल ठंडे पानी से कपड़े धोने में भी हिचकिचाते हैं वहीं मीरा सुबह-सुबह बस धोने के काम को अपने दिनचर्या में उतार चुकी है। मीरा ने महिला सशक्तिकरण की मिसाल कायम की है.

मीरा के जज्बे को देश का सलाम।

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