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Lakshman Jhula: ऋषिकेश का विश्वप्रसिद्ध लक्ष्मण झूला पुल हुआ इस वजह से बन्द, पर्यटकों की आवाजाही पर लगा प्रतिबंध

Lakshman Jhula closed down for public

Lakshman Jhula : ऋषिकेश में गंगा के ऊपर बना सस्पेंशन ब्रिज लक्ष्मण झूला शुक्रवार को जनता के लिए बंद कर दिया गया। यह फैसला सुरक्षा कारणों से लिया गया है। ब्रिटिश शासनकाल में बने 96 साल पुराने इस संकरे पुल का टावर एक ओर झुका हुआ प्रतीत हो रहा है। अभी तक पुल का इस्तेमाल केवल पैदल यात्री और दो पहिया वाहन करते थे।

विशेषज्ञों का मानना है कि लक्ष्मण झूला अब अधिक भार कायम नहीं रख सकता। अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने कहा कि विशेषज्ञों की एक टीम ने निरीक्षण में पाया कि पुल के अधिकांश पुर्जे और अन्य सामान पुराने हो चुके हैं, जिसकी वजह से किसी भी समय पुल के ढहने का खतरा बना हुआ है।

Lakshman Jhula: अधिक भार पड़ने से कभी भी ढ़ह सकता है

Lakshman Jhula Rishikesh

अपर मुख्य सचिव ने आगे कहा कि टीम ने सभी यातायात और पैदल चलने वालों के लिए पुल को तत्काल बंद करने की सिफारिश की थी, क्योंकि पुल पर अधिक भार पड़ने से वह किसी भी समय ढह सकता है। हाल के दिनों में पुल के ऊपर यातायात और पैदल यात्रियों की आवाजाही में अत्यधिक वृद्धि हुई है और पुल का टावर एक तरफ झुकते हुए दिखाई दे रहे हैं।

सुरक्षा के दृष्टिकोण से पुल के ऊपर आवाजाही पर पूरी तरह से रोक लगाई गई है ताकि भविष्य में कोई बड़ी दुर्घटना ना हो। डिजाइन टेक स्ट्रक्चरल कंसल्टेंट की ओर से दी गई रिपोर्ट में कहा गया था कि पुल का तमाम हिस्सा खराब हो चुका है और टूटने की स्तिथि में है। रिपोर्ट में कहा गया कि पुल पर तत्काल आवाजाही बंद कर देनी चाहिए अन्यथा कोई भी बड़ा हादसा कभी भी हो सकता है।

ऋषिकेश में गंगा नदी के ऊपर 1923 में निर्मित, लक्ष्मण झूला पुल उत्तराखंड में एक प्रतिष्ठित स्थल है जो योग और ध्यान का अध्ययन करने के लिए एक केंद्र के रूप में विश्व प्रसिद्ध है। ऋषिकेश आने वाले पर्यटकों और भक्तों के लिए यह पुल मुख्य आकर्षण में से एक रहा है। यह पुल टिहरी जिले में तपोवन गांव को नदी के पश्चिमी तट पर स्थित पौड़ी जिले के जोंक से जोड़ता है। इस पुल का नाम महाकाव्य रामायण के महत्वपूर्ण पात्र लक्ष्मण के नाम पर रखा गया था, क्योंकि यह कहा जाता है कि वह जूट की रस्सी के सहारे नदी को पार कर गए थे।

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