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केदारनाथ फिल्म के डायरेक्टर के लिए बढ़ी मुश्किलें, सरकार ने नए कानून बनाने की बात कही, जिसके तहत…

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उत्तराखंड में हर तरफ फिल्म ‘केदारनाथ’ की आलोचनाओं का बांध टूटा पड़ा है जिस का प्रकोप फिल्म निर्माता को झेलना पड़ रहा है। हर कोई बाबा केदार के नाम पर बनी इस फिल्म का जमकर विरोध कर रहा है और करें भी क्यों ना?

कुछ लोगों का कहना है कि “उत्तराखंड के भोले-भाले लोगों के बीच बनी इस फिल्म को फिल्माने की इजाजत शायद इसलिए भी दी गई होगी कि 2013 में आई भयंकर बाढ़ को लोगों के सामने रखा जाएगा और पूरी देश दुनिया को बड़े पर्दे पर दिखाया जाएगा की मंदाकिनी घाटी ने 2013 में मंदाकिनी नदी का वह विकराल रूप देखा था। जिसमें हजारों लोगों ने अपनी जाने गंवाई और आज तक वह उस सदमे से उबरने की कोशिश कर रहे हैं पर इसके उलट फिल्म केदारनाथ के निर्माता अभिषेक कपूर ने उत्तराखंड की ही नहीं बल्कि पूरे भारत के लोगों की आस्था और भावना के साथ खिलवाड़ किया है। फिल्म में वही बॉलीवुड का तड़का लगा और बना डाला फिल्म केदारनाथ को भी लव स्टोरी। इस मूवी की चर्चा आजकल उत्तराखंड के हर गली मोहल्ले और यहां तक कि विधानसभा सत्र में तक हो रही हैं”।

सेंसर बोर्ड ने भले ही फिल्म केदारनाथ को पास कर दिया हो लेकिन उत्तराखंड में इसका जमकर विरोध हो रहा है। प्रदर्शन और विरोध होने की वजह से प्रदेश में जिलाधिकारियों को कानून व्यवस्था के लिहाज से निर्णय लेने की छूट दी गई है। कानून व्यवस्था को देखते हुए प्रदेश के 7 जिलों में इस फिल्म के प्रदर्शन पर प्रतिबंध है।

अब राज्य सरकार फिल्म केदारनाथ के निर्माताओं को नोटिस देने जा रही है।सरकार कुछ ऐसे कानून बनाने की बात कर रही है जिससे की उत्तराखंड के धार्मिक स्थलों को केंद्र में रखकर इस तरह की कोई भी फिल्म भविष्य में ना बनने पाए। सरकार का मानना है कि ऐसे कानून की यहां सख्त जरूरत है जिसके तहत ,फिल्म के डायरेक्टर से बॉन्ड भरवाया जाएगा कि उनकी फिल्म का उद्देश्य क्या है।

वहीं उत्तराखंड के पर्यटन और संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने अपनी व्यक्तिगत राय में फिल्म केदारनाथ को करोड़ों लोगों की आस्था और भावनाओं के खिलाफ बताया है ।उन्होंने यह भी कहा कि केदारनाथ कोई हनीमून डेस्टिनेशन नहीं, बल्कि योग की धरती है जबकि फिल्म केदारनाथ की स्टोरी मे ‘लव जिहाद’ है।
पर्यटन मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार चाहती है कि फिल्म इंडस्ट्री उत्तराखंड में आए लेकिन यहां की संस्कृति से कोई छेड़छाड़ ना हो।
उन्होंने अपनी निजी राय में कहा कि फिल्म का नाम बदला भी जा सकता था।

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