75 साल की महिला ने नाथुला पास ट्रैक जब अकेले तय किया, मिलिये रीना वर्मा से

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रीना वर्मा. जिन्होंने ये साबित कर दिखाया की अगर इंसान के अंदर अगर कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो उम्र सिर्फ एक नंबर मात्र रह जाती है. 75 वर्ष की उम्र में उन्होंने वो कर दिखाया जिसकी वजह से वे आज युवाओं और उम्रदराज लोगों के लिए एक प्रेरणा-स्रोत है.

रीना वर्मा का जन्म 1932 में रावलपिंडी (अब पाकिस्तान) में हुआ। पुणे में रहने वाली महिला ने 75 साल की उम्र में नाथुला पास ट्रैक(Nathula Pass Trek) को अकेले तय किया। अब उनकी उम्र 87 की हो चुकी है। उन्होंने पुणे से नाथुला तक सभी रास्ते अकेले ही ट्रेक किए।

क्या है रीना वर्मा(Reena Verma) की कहानी?

उनका प्रारंभिक जीवन रावलपिंडी के पहाड़ी इलाकों में बीता। वे उन दिनों को याद करती है कि सभी मिलकर शांति से रहते थे, कभी ऐसा नही हुआ कि कोई साम्प्रदायिक दंगे हुए हों। वह दौर बहुत ही सुंदर हुआ करता था जो आज के मुकाबले बहुत अलग है।

विभाजन के बाद उनका परिवार पंजाब प्रांत में था। उन्होंने भारत के पहले गणतंत्र दिवस में भाग लिया है। उसी दिन नेपाल के राजा, पंडित नेहरू और यहां तक कि रानी एलिजाबेथ से उनकी मुलाकात भी हुई।

सेना के एक परिवार से संबंध रखने वाली इस महिला के जोश और जुनून में कभी कमी नही आई। श्रीमती वर्मा ने अपना जीवन एक खुले और उत्साहवर्धक माहौल में बिताया। इन सभी के पीछे उनके पिता की अहम भूमिका रही जिसमे वह लड़कियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए उत्सुक थे, ताकि उन्हें स्वतंत्र और सुरक्षित जीवन जीने में मदद मिल सके।

उनकी शादी के तुरंत बाद, बेंगलुरु के कावेरी एम्पोरियम में श्रीमती वर्मा ने नौकरी प्रारम्भ की, जहाँ उन्हें कई प्रतिष्टित लोगों से उन्हें प्रेरणा मिली।

अपने पति और बेटे को जल्दी खो देने के बाद उनके जीवन मे ठहराव आया, जिसके कारण उनका जीवन काफी उतार चढ़ाव वाले दौर से गुजरा। लेकिन जीवन के इस चक्र में फिर से वह अपने निर्धारित लक्ष्य को पाने के लिए हिम्मत जुटाने में कामयाब रहीं।

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उसने यह कैसे किया?

पहाड़ों के प्रति उनका प्यार ही था जो उन्हें साहसिक और चुनौतीपूर्ण रास्तों पर ले जाने के लिए प्रेरित करता था।

अपने बीते दिनों को याद करके वह कहती थी “मैं सिलीगुड़ी में थी, और चूंकि मेरे साथ आने का समय किसी के पास नहीं था, इसलिए मैंने खुद ही साहसिक यात्रा पर जाने का फैसला किया। मैंने एक बस ली और मैं चली गयी।”

हालाँकि नाथुला दर्रे पर जाना बहुत साहसिक काम है, लेकिन उनकी उम्र ने कभी उनके उत्साह को कम नही होने दिया। यह सब कर पाने के लिए वह अपने स्वस्थ और फिट जीवन को श्रेय देती हैं।

87 साल की उम्र में भी वह कई कार्यक्रमों में भाग लेती हैं। हाल के कुछ समय मे उन्होंने तीन वॉकथॉन भी जीते हैं।

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