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देहरादून-हरिद्वार रूट के लिए उत्तराखंड मेट्रो रेल कारपोरेशन ने उठाया निर्णयक कदम, सरकार की सुस्ती के चलते हो रही थी देरी

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देहरादून से हरिद्वार मेट्रो पर अब तेजी से पंख लगने वाले हैं। कॉमप्रीहैन्सिव मोबिलिटी प्लान (CMP) के लिए शासन की स्वीकृति में देरी के चलते मेट्रो कारपोरेशन ने इसके अनुरूप डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) में अपने स्तर पर संसोधन करना शुरू कर दिया है। पिछले करीब एक महीने से यह प्लान आवास विभाग में स्वीकृति के लिए लंबित पड़ा है।

देहरादून हरिद्वार मेट्रो के लिए जर्मनी के लाइट रेल ट्रांजिट सिस्टम (LRTS) और लंदन के पर्सनलाइज्ड रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम (PRTS) को मुफीद पाया गया है। कुछ महीने पहले शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय दल ने जर्मनी व लन्दन का दौर कर रिपोर्ट तैयार की थी। हरिद्वार-नेपाली फार्म-ऋषिकेश-देहरादून के बीच पीआरटी व एलआरटी सिस्टम को अनुकूल पाया गया है।

लाइट रेल ट्रांजिट सिस्टम (LRTS)-

आधुनिक ट्रासपोर्ट सिस्टम के मद्देनजर अध्ययन दल ने जर्मनी के फ्रैंकफर्ट व कॉलोन शहर के एलआरटीएस को दून के नजरिये से परखा था। रेलवे की लाइट रेल ट्रांजिट सिस्टम आमतौर पर ओवरहेड विद्युत तारों द्वारा संचालित होती है और महानगरीय क्षेत्रों में मध्यम क्षमता के स्थानीय परिवहन के लिए उपयोग की जाती है। लाइट रेल वाहन (LRV) स्ट्रीटकार्स (ट्राम) का एक तकनीकी विस्तार है। विशेष रूप से भीड़भाड़ वाले शहरी क्षेत्रों में इसे भूमिगत और बाहरी छेत्रों में सड़क के मध्य ट्रैक बना कर इसे चलाया जाता है। LRTS आधारित मेट्रो रेल को 50 मीटर के मोड़ पर भी आसानी से चलाया जा सकता है। इसी वजह से इसे दून के लिहाज से उपयुक्त माना गया है।

पर्सनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (PRTS)-

पर्सनल रैपिड ट्रांज़िट , जिसे पॉड कार के रूप में भी जाना जाता है, एक प्रकार का स्वचालित गाइडवे ट्रांजिट (AGT) है। पीआरटी वाहन व्यक्तिगत तौर पर छोटा और हल्का होता है जिसमे आमतौर पर तीन से छह यात्री सफ़र कर सकते हैं। यह बीच में पड़ने वाले सभी स्टेशनों को दरकिनार करते हुए नॉनस्टॉप, पॉइंट-टू-पॉइंट यात्रा की अनुमति देता है। लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पर इसका संचालन हो रहा है। अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक ट्रैफिक जाम के झंझट से बचने के लिए पॉड टैक्सी बहुत अहम है। रोपवे या केबल कार ट्रासपोर्ट सिस्टम में भी इसका प्रयोग फायदेमंद रहेगा।

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