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​उत्तराखंड के 2 वीर सपूत फिर हुए शहीद

खून कहो किस मतलब का,
जिसमें उबाल का नाम नहीं ?
वह खून कहो किस मतलब का,
आ सके देश के काम नहीं ?

शायद कुछ यही पंक्तियां होती है जो हमारे देश के नौजवानों को प्रेरणा देती है कि उसे अपनी मातृभूमि को बचाने के लिए एक दिन अपने देश के लिए शहीद होना होगा।

ऐसा ही कुछ हुआ जम्मू-कश्मीर के राजौरी इलाके में जहां पर माइन ब्लास्ट की चपेट में आने से उत्तराखंड के 2 वीर सपूत सुरजीत सिंह राणा और 8 कुमाऊं रेजिमेंट के जवान लांस नायक सूरज सिंह शहीद हो गए।

शहीद सुरजीत सिंह राणा पुत्र स्वर्गीय प्रेम सिंह राणा चमोली के स्यूँण गांव के रहने वाले थे, जो 10वीं गढ़वाल में सेवारत थे।
सुरजीत सिंह राजौरी में अभियान के दौरान माइन ब्लास्ट की चपेट में आकर मौके पर ही शहीद हो गए।

उनके परिवार को जब इस बात की खबर दी गई तो तब से उनका रो रो कर बुरा हाल है। अभी 1 साल पहले ही सुरजीत की पत्नी का देहांत हुआ था। उनकी कोई संतान नहीं है। सुरजीत के पिता का देहांत भी 22 साल पूर्व हो गया था। परिवार में चार बहने और एक बड़ा भाई है।

सुरजीत के बड़े भाई महावीर गांव में ही रहते हैं, उनके भाई बताते हैं कि पिता ना होने के कारण सुरजीत ने जैसे-तैसे पढ़ाई कर सेना में भर्ती हुआ और अभी घर संभला ही था कि बहादुर भाई शहीद हो गया।
बता दें कि खौड़ थाने के अंतर्गत कलीठ फील्ड फायरिंग रेंज पर पलांवाला के चपरेयाल क्षेत्र में शनिवार को अभ्यास के दौरान माइन ब्लास्ट हो गया। इसकी चपेट में आने से सेना के दो जवान शहीद हो गए। हादसे में एक सैनिक घायल हो गया है। घायल जवान को इलाज के लिये सेना के कमान अस्पताल उधमपुर भेज दिया गया है।

उत्तराखंड के इन वीर सपूतों को शत-शत नमन।

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