हमारी बात

उत्तराखंड के पहाड़ी गाँव में राशन की दुकान के बाहर खड़े ग्रामीण और भीतर बैठे दुकानदार का यथार्थ दृश्य

राशन की दुकान और उधार की कॉपी

एक पहाड़ी गाँव की वह छोटी-सी दुकान, जहाँ जरूरत के समय हिसाब से पहले भरोसा लिखा जाता था। वहाँ उधार केवल लेन-देन नहीं था, बल्कि सामाजिक संबंधों और आपसी उत्तरदायित्व की एक मौन परंपरा थी।

परीक्षा केंद्र के बाहर प्रवेश से पहले खड़े प्रतियोगी परीक्षा के अभ्यर्थी

पहाड़ का युवा और प्रतियोगी परीक्षाएँ : अवसर की डगर या दबाव का बोझ?

पहाड़ का युवा वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में समय, ऊर्जा और उम्मीद लगाता है। यह मार्ग कई बार अवसर का द्वार बनता है, तो कई बार अनिश्चितता और सामाजिक अपेक्षाओं का दबाव भी साथ लाता है।

उत्तराखंड की पहाड़ी ढलान पर पत्थर की मेड़ों से बने सीढ़ीदार खेत

सीढ़ीदार खेत : आख़िर इतनी खड़ी जगहों पर ये खेत किसने बनाए? कैसे बनाए?

मध्य हिमालय की ढलानों पर उकेरी गई ये सीढ़ियाँ केवल खेत नहीं हैं। वे उस सामूहिक श्रम और भूगोल की समझ का परिणाम हैं, जिसने खड़ी पहाड़ियों को जीवन-योग्य कृषि भूमि में बदला।