
“एक उम्र बाद मैं वापस लौट आऊँगा”: एक पहाड़ी मन की कहानी
मेरे बटुए में आज भी एक पुरानी चाबी रखी है।
शायद वह अब किसी ताले में फिट भी न बैठे, लेकिन मेरे लिए वह घर लौटने का वादा है।
शहर में रहते हुए आदमी बहुत कुछ बदल देता है–रहने की जगह, बोलने का तरीका, खाने का समय, सोने की आदतें और कई बार अपने सपनों की शक्ल भी। लेकिन कुछ चीजें नहीं बदलतीं। जैसे मन के किसी कोने में रखा अपना गांव। जैसे बंद पड़े घर का दरवाज़ा। जैसे वह रास्ता, जो सालों बाद भी याद रहता है।







