
पहाड़ का भविष्य : पर्यटन, सेना या टेक्नोलॉजी?
प्रश्न यह नहीं कि इन तीनों में से कौन बेहतर है। प्रश्न यह है कि पहाड़ का भविष्य किस दिशा में संतुलित और स्थायी रह सकता है।

प्रश्न यह नहीं कि इन तीनों में से कौन बेहतर है। प्रश्न यह है कि पहाड़ का भविष्य किस दिशा में संतुलित और स्थायी रह सकता है।

एक पहाड़ी गाँव की वह छोटी-सी दुकान, जहाँ जरूरत के समय हिसाब से पहले भरोसा लिखा जाता था। वहाँ उधार केवल लेन-देन नहीं था, बल्कि सामाजिक संबंधों और आपसी उत्तरदायित्व की एक मौन परंपरा थी।

पहाड़ का युवा वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में समय, ऊर्जा और उम्मीद लगाता है। यह मार्ग कई बार अवसर का द्वार बनता है, तो कई बार अनिश्चितता और सामाजिक अपेक्षाओं का दबाव भी साथ लाता है।

मध्य हिमालय की ढलानों पर उकेरी गई ये सीढ़ियाँ केवल खेत नहीं हैं। वे उस सामूहिक श्रम और भूगोल की समझ का परिणाम हैं, जिसने खड़ी पहाड़ियों को जीवन-योग्य कृषि भूमि में बदला।

उत्तराखंड के पहाड़ों में झंगोरे की खीर कैसे अकाल के अन्न से उत्सव के व्यंजन तक पहुँची, जानिए इसके इतिहास, परंपरा और पोषण महत्व को।