
एक जवान, एक पोस्ट और 72 घंटे की लड़ाई, शहादत के बाद भी मिलती हैं छुट्टी और प्रमोशन
पौड़ी गढ़वाल के जसवंत सिंह रावत ने 1962 युद्ध में नूरानांग पोस्ट पर कैसे असाधारण साहस दिखाया और उनके नाम से जुड़ी परंपराएँ आज भी क्यों जीवित हैं।

पौड़ी गढ़वाल के जसवंत सिंह रावत ने 1962 युद्ध में नूरानांग पोस्ट पर कैसे असाधारण साहस दिखाया और उनके नाम से जुड़ी परंपराएँ आज भी क्यों जीवित हैं।

पिथौरागढ़ के मिलम गाँव से निकले नैन सिंह रावत ने कैसे तिब्बत में कदम गिनकर दूरी और भूगोल मापा और दुनिया के नक्शे को नई जानकारी दी।

कुमाऊँ क्षेत्र में गोल्ज्यू देवता के मंदिरों में लोग चिट्ठी लिखकर न्याय की गुहार लगाते हैं। जानिए इस परंपरा, घोड़ाखाल मंदिर और लोककथाओं से जुड़ी मान्यताएँ।

बद्रीनाथ धाम में आरती, मंत्र और घंटियों के बावजूद शंखनाद नहीं होता। जानिए इसके पीछे की लोककथाएँ, आध्यात्मिक कारण और हिमालयी परंपरा से जुड़ी मान्यताएँ।

टिहरी गढ़वाल के जनआंदोलन में श्री देव सुमन की 84 दिनों की भूख हड़ताल ने कैसे जनचेतना को नई दिशा दी और उनके बलिदान का क्या प्रभाव पड़ा।

गढ़वाल से जुड़े एक सैनिक के जीवन का वह ऐतिहासिक प्रसंग, जहाँ पेशावर में दिए गए सैन्य आदेश के सामने मानवीय संवेदना को प्राथमिकता दी गई और उसका दूरगामी प्रभाव क्या रहा।

कसार देवी मंदिर अल्मोड़ा के पास स्थित एक प्राचीन स्थल है जो आस्था, आध्यात्मिक साधना और हिमालयी प्रकृति के लिए जाना जाता है। यह स्थान स्वामी विवेकानंद की यात्रा और भू-चुंबकीय क्षेत्र की चर्चाओं से भी जुड़ा माना जाता है।

टिहरी गढ़वाल के घनसाली क्षेत्र के पास स्थित खैट पर्वत गढ़वाल की लोककथाओं में “परियों का देश” के रूप में जाना जाता है, जहाँ प्रकृति, रहस्य और स्थानीय मान्यताओं से जुड़ी कई कहानियाँ सुनाई जाती हैं।

1930 में उत्तरकाशी के तिलाड़ी मैदान में हुई गोलीबारी की घटना को तिलाड़ी कांड के नाम से जाना जाता है। निहत्थे ग्रामीणों पर हुई इस कार्रवाई को कई लोग “गढ़वाल का जलियांवाला बाग” भी कहते हैं।

चमोली के वाण गाँव में स्थित लाटू देवता मंदिर की उस अनूठी परंपरा के बारे में जानिए, जहाँ गर्भगृह में प्रवेश के समय पुजारी आँखों पर पट्टी क्यों बाँधते हैं और इसके पीछे की लोकमान्यता क्या है।