युवा उत्तराखंड

Kalpana Bisht stands inside the Swabhiman Mahila Bakery Unit with bakery products prepared from mandua and other local ingredients in Vikasnagar, Uttarakhand.

पारंपरिक मंडुवे से आधुनिक कारोबार: कल्पना बिष्ट ने गांव में तैयार किया रोजगार का नया मॉडल

उत्तराखंड के पारंपरिक मंडुवे की असली क्षमता केवल खेती तक सीमित नहीं है। सही प्रशिक्षण, बेहतर पैकेजिंग और बाजार से जुड़ने पर यही स्थानीय अनाज गांवों में रोजगार, महिला उद्यमिता और टिकाऊ आजीविका का मजबूत आधार बन सकता है। कल्पना बिष्ट की पहल इसी बदलाव की एक मिसाल है।

Women from the Maa Dunagiri Pirul Group in Dwarahat display handcrafted baskets and decorative products made from pine needles during community activities, exhibitions and training sessions.

पिरूल से पहचान: द्वाराहाट की महिलाओं ने हस्तशिल्प के जरिए बनाया स्वरोजगार का रास्ता

पहाड़ों में रोजगार की कमी और पलायन के बीच यह पहल दिखाती है कि स्थानीय संसाधन भी आजीविका का मजबूत आधार बन सकते हैं। द्वाराहाट की महिलाओं ने जिस पिरूल को कभी बेकार समझा जाता था, उसी को हुनर और मेहनत से पहचान, आमदनी और दूसरी महिलाओं के लिए प्रेरणा में बदल दिया।

Tara Thapa and Sushila during their fitness journey in Dehradun, highlighting their regular running activities and community participation.

देहरादून का यह कपल अब 20 किमी दौड़कर दूसरों को कर रहा प्रेरित, 50 की उम्र के आसपास शुरू हुआ फिटनेस सफर

फिटनेस की शुरुआत हमेशा लंबी दौड़ से नहीं होती। कई बार छोटे-छोटे बदलाव और लगातार बनी रहने वाली आदतें ही समय के साथ बड़ा परिवर्तन लेकर आती हैं। इस सफर की सबसे बड़ी सीख क्या है, जानिए…

चमोली की उद्यमी दिव्या रावत मशरूम उत्पादन केंद्र में

पहाड़ की ‘मशरूम लेडी’: दिव्या रावत ने मशरूम खेती से खोले रोजगार के नए रास्ते, पलायन रोकने की पहल

चमोली की दिव्या रावत ने मशरूम खेती के माध्यम से हजारों परिवारों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा किए और पहाड़ों में पलायन की समस्या के समाधान की दिशा में एक नई पहल की।

नमकवाली ब्रांड की संस्थापक शशि बहुगुणा रतूड़ी और स्थानीय महिलाएँ

पहाड़ की ‘नमकवाली’: ₹1,000 से शुरू हुआ सफर बना ₹5 करोड़ का कारोबार, शशि बहुगुणा रतूड़ी की प्रेरक कहानी

उत्तराखंड की उद्यमी शशि बहुगुणा रतूड़ी ने ₹1,000 से शुरू हुए पारंपरिक “पिस्यू लून” के छोटे व्यवसाय को आज करोड़ों के ब्रांड “नमकवाली” में बदल दिया है।

नैनीताल जिले के ओखलकांडा क्षेत्र में पौधरोपण के लिए पौधे तैयार करते चंदन नयाल

पहाड़ का “ट्री मैन”: चंदन नयाल ने 12 वर्षों में लगाए 80,000 से अधिक पेड़, जंगल और जल संरक्षण की अनोखी मिसाल

नैनीताल जिले के ओखलकांडा क्षेत्र के चंदन नयाल ने पिछले 12 वर्षों में 80,000 से अधिक पेड़ लगाकर और हजारों चाल-खाल बनाकर पहाड़ों में जल और जंगल संरक्षण की अनोखी मिसाल पेश की है।

बागेश्वर जिले के किसान जगदीश चंद्र कुणियाल पौधा लगाते हुए

बंजर ज़मीन से हरियाली तक: उत्तराखंड के 60 वर्षीय किसान ने लगाए एक लाख पेड़, बदल दी पूरे गांव की तस्वीर

बागेश्वर जिले के सिरकोट गांव के किसान जगदीश चंद्र कुणियाल ने चार दशकों में लगभग एक लाख पेड़ लगाकर बंजर जमीन को घने जंगल में बदल दिया और पूरे गांव की सोच बदल दी।