
नंदा देवी राजजात: 280 किलोमीटर की वह यात्रा जहाँ देवी को बेटी मानकर विदा किया जाता है, लेकिन क्यों?
नंदा देवी राजजात उत्तराखंड की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक यात्राओं में से एक मानी जाती है। परंपरागत रूप से यह यात्रा लगभग 12 वर्ष के अंतराल पर आयोजित होती है और चमोली जिले के नौटी गाँव से आरंभ होकर लगभग 280 किलोमीटर लंबे मार्ग से होमकुंड तक पहुँचती है। लोकपरंपरा में इसे नंदा देवी की अपने मायके से कैलाश स्थित ससुराल की प्रतीकात्मक यात्रा माना जाता है। यात्रा के प्रमुख पड़ावों में कुलसारी, वाण, बेदनी बुग्याल, रूपकुंड और होमकुंड शामिल हैं। चौसिंग्या खाडू (चार सींग वाला मेढ़ा) इस यात्रा की सबसे विशिष्ट परंपराओं में से एक है, जबकि लाटू देवता को नंदा देवी का धर्मभाई और यात्रा का रक्षक माना जाता है। धार्मिक महत्व के साथ-साथ राजजात उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, लोकस्मृति और हिमालयी सामाजिक परंपराओं का भी एक महत्वपूर्ण प्रतीक है।








