प्रकृति और पहाड़

हिमालय के ऊंचे इलाके में झुककर जमीन से कीड़ा जड़ी खोजते स्थानीय लोग

3,000 मीटर से ऊपर बर्फ पिघलते ही क्यों शुरू होती है कीड़ा जड़ी की तलाश, और कैसे उत्तराखंड के बुग्यालों में यह जड़ी जोखिम, आजीविका और वैश्विक बाजार को जोड़ती है

उत्तराखंड के ऊंचे इलाकों में हर साल कीड़ा जड़ी की तलाश के लिए लोग सीमित समय के लिए पहाड़ों में जाते हैं।
जानिए इसकी खोज, स्थानीय अधिकार, कमाई और उससे जुड़े जोखिमों की पूरी कहानी।

उत्तराखंड के चीड़ के जंगल में ढलान पर फैलती आग और धुआँ

जलते जंगलों के बीच खड़ा पहाड़, क्या धुएँ में घुल रही है हमारी पहाड़ी पहचान

जलते जंगलों के बीच खड़ा पहाड़ और धुएँ में घुलती पहाड़ी पहचान उत्तराखंड में वनाग्नि के बढ़ते संकट की ओर संकेत करती है। जानिए इसके कारण, प्रभाव और समाधान।

उत्तराखंड के हिमालय में स्थित नंदा देवी पर्वत शिखर

नंदा देवी शिखर पर चढ़ाई क्यों प्रतिबंधित है?

नंदा देवी भारत की दूसरी सबसे ऊँची चोटी है, लेकिन इसके मुख्य शिखर पर पर्वतारोहण प्रतिबंधित है। इसके पीछे पर्यावरण संरक्षण, ऐतिहासिक घटनाएँ और हिमालय की संवेदनशील पारिस्थितिकी जैसे कई कारण जुड़े हुए हैं।

उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित रूपकुंड झील

रूपकुंड: हिमालय की वह रहस्यमयी झील जहाँ मिले सैकड़ों मानव

चमोली जिले में स्थित रूपकुंड झील को “स्केलेटन लेक” के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यहाँ बर्फ पिघलने पर सैकड़ों मानव कंकाल दिखाई देते हैं। यह रहस्य आज भी वैज्ञानिकों और इतिहासकारों को आकर्षित करता है।

चोपता क्षेत्र में वसंत ऋतु में खिला हुआ बुराँश का वृक्ष

चोपता : खूबसूरत गुलाबी बुराँश का अद्भुत संसार

वसंत में जब चोपता के ढलानों पर बुराँश खिलता है, तो वह केवल जंगल को रंग नहीं देता;
वह उस हिमालयी संतुलन को उजागर करता है जिस पर यह पूरा पारिस्थितिक तंत्र टिका है।

उत्तराखंड के मध्य हिमालय क्षेत्र में बाँज के घने जंगल का प्राकृतिक दृश्य

बाँज के जंगल और पहाड़ी जलस्रोत : पर्यावरण का चक्र

पहाड़ में किसी धारा का जीवित रहना केवल वर्षा पर निर्भर नहीं होता। बाँज के जंगल, मिट्टी की संरचना और मानवीय हस्तक्षेप मिलकर उस जल चक्र को आकार देते हैं, जिस पर गाँवों का अस्तित्व टिका रहता है।