उम्र के पांचवें दशक में पहुंचने के बाद कई लोग शारीरिक परेशानियों को सक्रिय जीवन की राह में बाधा मान लेते हैं। देहरादून के तारा थापा और सुशीला ने भी कमर दर्द, घुटनों की तकलीफ और पुरानी चोट जैसी चुनौतियों का सामना किया, लेकिन उन्होंने धीरे-धीरे व्यायाम और दौड़ को अपनी दिनचर्या में शामिल किया। मई 2026 में उनकी 20 किलोमीटर की दौड़ का वीडियो सामने आने के बाद उनकी फिटनेस यात्रा सोशल मीडिया पर चर्चा में आई।
सोशल मीडिया पोस्ट के मुताबिक दोनों ने सुबह करीब 5:30 बजे देहरादून के निम्बूवाला क्षेत्र से दौड़ शुरू की और पुरकुल तक करीब 20 किलोमीटर की दूरी पूरी की। वीडियो में दोनों अलग-अलग पड़ावों पर लगातार दौड़ते दिखाई दिए। हालांकि इस एक दौड़ के पीछे कई वर्षों की नियमित मेहनत और अभ्यास रहा है।
तारा ने वर्ष 2017 के आसपास अपने स्वास्थ्य और फिटनेस पर गंभीरता से काम करना शुरू किया था। उस समय वह कमर दर्द से परेशान थे और काम तथा पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण शारीरिक गतिविधियां उनकी दिनचर्या से लगभग गायब हो चुकी थीं।
उन्होंने सुबह जल्दी उठकर नियमित व्यायाम शुरू किया। शुरुआत किसी लंबी दूरी या मैराथन के लक्ष्य से नहीं हुई थी। उन्होंने शरीर की क्षमता के अनुसार अभ्यास किया और धीरे-धीरे अपनी सहनशक्ति तथा दौड़ की दूरी बढ़ाई।
लगातार अभ्यास से तारा की जीवनशैली में आए बदलाव ने सुशीला को भी प्रेरित किया। सुशीला घुटनों की तकलीफ, शरीर में दर्द और पैर में लगी पुरानी चोट जैसी शारीरिक चुनौतियों से गुजर चुकी थीं। उन्होंने वर्ष 2019 से तारा के साथ नियमित अभ्यास शुरू किया।
दोनों ने सीधे लंबी दूरी की दौड़ लगाने के बजाय धीरे-धीरे अपनी गतिविधि बढ़ाई। सुबह जल्दी उठना, नियमित रूप से चलना या दौड़ना और शरीर की क्षमता के अनुसार अभ्यास करना उनकी साझा दिनचर्या का हिस्सा बन गया।
समय के साथ दोनों ने लंबी दूरी की दौड़ों और मैराथन आयोजनों में हिस्सा लेना शुरू किया। मई में पूरी की गई 20 किलोमीटर की दौड़ भी इसी निरंतर अभ्यास का परिणाम थी। इस दौड़ के जरिए उन्होंने यह संदेश देने का प्रयास किया कि बढ़ती उम्र को पूरी तरह निष्क्रिय रहने का कारण नहीं बनाया जाना चाहिए।
उनकी फिटनेस यात्रा केवल निजी उपलब्धि तक सीमित नहीं रही। सुशीला ने महिलाओं को दौड़ और नियमित व्यायाम से जोड़ने के लिए ‘पिंक पैंथर्स’ नाम से एक महिला रनिंग समूह भी शुरू किया।
इस समूह से जुड़ी महिलाओं ने अपनी क्षमता के अनुसार चलना और दौड़ना शुरू किया। इनमें से कई महिलाएं धीरे-धीरे पांच से दस किलोमीटर तक की दूरी पूरी करने लगीं। समूह का उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षित और सहयोगपूर्ण वातावरण में नियमित शारीरिक गतिविधियों से जोड़ना है।
इसी पहल को आगे बढ़ाते हुए 8 मार्च 2026 को देहरादून में पिंक हाफ मैराथन के पहले संस्करण का आयोजन किया गया। इसमें 2 किलोमीटर, 5 किलोमीटर, 10 किलोमीटर और 21.1 किलोमीटर की अलग-अलग श्रेणियां रखी गई थीं। आयोजन से महिलाओं और परिवारों को दौड़ तथा सक्रिय जीवनशैली से जोड़ने का प्रयास किया गया।
तारा और सुशीला अपनी फिटनेस गतिविधियों, दौड़ और मैराथन से जुड़े अनुभव सोशल मीडिया पर भी साझा करते हैं। उनकी पोस्ट पर कई लोगों ने नियमितता और बढ़ती उम्र में सक्रिय जीवन अपनाने के उनके प्रयास की सराहना की।
हालांकि उनकी यात्रा को किसी बीमारी के इलाज या सभी लोगों के लिए एक जैसी फिटनेस योजना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। कमर दर्द, घुटनों की समस्या, पुरानी चोट या किसी गंभीर स्वास्थ्य स्थिति से जूझ रहे लोगों को व्यायाम शुरू करने से पहले चिकित्सक या योग्य विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए। दूरी और मेहनत भी शरीर की क्षमता के अनुसार ही बढ़ानी चाहिए।
तारा और सुशीला की कहानी में सबसे अहम उनकी 20 किलोमीटर की दौड़ नहीं, बल्कि वर्षों तक बनाए रखा गया अनुशासन है। कुछ कदमों से शुरू हुई यह आदत अब न केवल उनकी जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है, बल्कि देहरादून की दूसरी महिलाओं और परिवारों को भी सक्रिय जीवन की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही है।
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