उत्तराखंड की बहुप्रतीक्षित 125 Km लंबी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना ने निर्माण मोर्चे पर एक महत्वपूर्ण पड़ाव हासिल कर लिया है। हिमालयी क्षेत्र की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच इस परियोजना में सुरंग निर्माण का कार्य तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, जिसे पूरे रेल कॉरिडोर की रीढ़ माना जाता है।
सरकार द्वारा लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, इस परियोजना में कुल 16 मेनलाइन सुरंगें (लगभग 104 Km) और 12 एस्केप सुरंगें (करीब 98 Km) बनाई जा रही हैं। ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि यह रेल लाइन बड़े पैमाने पर सुरंगों के माध्यम से विकसित की जा रही है, जो पहाड़ी भू-भाग की जटिलता को दर्शाते हैं।
सुरंग निर्माण में तेज़ प्रगति
रेल मंत्रालय के अनुसार, अब तक लगभग 99 Km लंबी मेनलाइन सुरंगों का निर्माण पूरा किया जा चुका है। इसके साथ ही 9 एस्केप सुरंगो का निर्माण कार्य भी पूर्ण किया जा चूका है, जिनकी कुल लंबाई 94 Km से अधिक है।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में लिखित उत्तर में कहा, “अब तक 99 Km लंबाई की मेनलाइन टनल और 94 Km से अधिक लंबाई की 9 एस्केप टनल पूरी की जा चुकी हैं।”
मेनलाइन और एस्केप सुरंगों को मिलाकर अब तक लगभग 193 Km सुरंग निर्माण पूरा किया जा चुका है, जबकि कुल निर्धारित सुरंग लंबाई करीब 202 Km है। इसे परियोजना की प्रगति में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
लंबी रेल सुरंगों में सुरक्षा के लिहाज से एस्केप सुरंगें अत्यंत महत्वपूर्ण होती हैं। ये आपातकालीन स्थिति में यात्रियों की निकासी और राहत कार्यों के लिए वैकल्पिक मार्ग प्रदान करती हैं।
कठिन भूगोल में इंजीनियरिंग का उदाहरण
परियोजना का अधिकांश हिस्सा सुरंगों के भीतर से गुजरता है, क्योंकि हिमालयी क्षेत्र की भौगोलिक संरचना अत्यंत संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण है। निर्माण कार्य को गति देने के लिए 8 एडिट (Intermediate access points – मध्यवर्ती प्रवेश बिंदु) बनाए गए, जो अब पूरी तरह तैयार हो चुके हैं। इनके माध्यम से विभिन्न स्थानों से एक साथ खुदाई का कार्य संभव हो पाया है।
इस रेल लाइन में 19 महत्वपूर्ण/बड़े पुलों का निर्माण भी शामिल है। इनमें से 8 पुलों का निर्माण पूरा किया जा चुका है, जबकि शेष पुलों पर कार्य तेज़ी से जारी है।
रेल मंत्री ने बताया कि,
“परियोजना में 19 प्रमुख पुलों का निर्माण किया जाना है, जिनमें से 8 पुल पूरे हो चुके हैं और बाकी पर काम जारी है।”
परियोजना के पूर्ण होने पर यह रेल लाइन देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग और चमोली जैसे प्रमुख जिलों को एक मजबूत संपर्क तंत्र में जोड़ेगी। इसके साथ ही, देवप्रयाग, कर्णप्रयाग, बद्रीनाथ और केदारनाथ जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों की यात्रा और अधिक सुगम हो जाएगी।
यह महत्वाकांक्षी रेल परियोजना न केवल यात्रा समय को कम करेगी, बल्कि पहाड़ी क्षेत्रों में एक विश्वसनीय ऑल-वेदर परिवहन विकल्प भी प्रदान करेगी। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में, जहां भूस्खलन और सड़क अवरोध जैसी चुनौतियां अक्सर जनजीवन को प्रभावित करती हैं।




