
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर योगमय हुआ उत्तराखंड
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में सामूहिक योगाभ्यास और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस वर्ष की थीम और प्रदेशभर में हुए आयोजनों की खास बातें क्या रहीं, जानिए।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में सामूहिक योगाभ्यास और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस वर्ष की थीम और प्रदेशभर में हुए आयोजनों की खास बातें क्या रहीं, जानिए।

अब आधार से जुड़े काम के लिए डाकघर के कई चक्कर लगाने की जरूरत कितनी कम हो सकती है और नई स्लॉट बुकिंग सुविधा लोगों का इंतजार कैसे घटा सकती है? पूरी प्रक्रिया जानिए।

विश्व धरोहर फूलों की घाटी पर्यटकों के लिए खुल गई है, लेकिन अभी वहां क्या-क्या देखने को मिल रहा है? कितने फूल खिल चुके हैं, प्रवेश शुल्क कितना है और किस समय घाटी सबसे खूबसूरत दिखती है—जानिए पूरी जानकारी।

17 साल इंतजार करने वाली टीम अब लगातार दूसरी ट्रॉफी जीत रही है। विराट कोहली की नाबाद पारी और फाइनल में आरसीबी के दबदबे के बीच आखिर गुजरात टाइटंस मुकाबले से कहाँ पिछड़ गई?

पो चा केवल एक अलग तरह की चाय नहीं थी, बल्कि सीमांत हिमालयी जीवन का हिस्सा थी। नमक, मक्खन और गर्माहट से जुड़ा यह पेय ठंड, मेहनत और पहाड़ी जीवन की जरूरतों के अनुसार कैसे विकसित हुआ, जानिए।

गर्मियों में बुग्यालों की ओर और सर्दियों में निचले इलाकों की तरफ—हिमालय के भेड़ पालकों का जीवन हमेशा चलते रहने वाली एक व्यवस्था रहा है। आखिर कैसे मौसम, रास्ते और पशुपालन मिलकर इस पूरी जीवन-पद्धति को आकार देते थे?

मसूरी अकादमी में महीनों के कठिन प्रशिक्षण के बाद 133 नए युवा अधिकारी अब आईटीबीपी की मुख्यधारा का हिस्सा बन गए हैं। हिमालयी सीमाओं जैसी कठिन परिस्थितियों में तैनाती से पहले इन अधिकारियों ने किन चुनौतियों के लिए तैयारी की, जानिए।

लगातार बारिश के बीच केदारनाथ यात्रा को फिलहाल रोक दिया गया है। श्रद्धालुओं को अलग-अलग सुरक्षित पड़ावों पर रोका गया है, जबकि प्रशासन मौसम सामान्य होने का इंतजार कर रहा है। आखिर किन इलाकों में रोका गया है आवागमन और आगे क्या है स्थिति?

नौला और धारा कभी पहाड़ की जल-व्यवस्था की रीढ़ हुआ करते थे। पानी लाने से लेकर स्रोत बचाने तक, यह केवल सुविधा नहीं बल्कि सामुदायिक समझ और संतुलन पर आधारित व्यवस्था थी।

ITBP बनने से पहले उत्तराखंड की सीमाओं की निगरानी कैसी होती थी? स्थानीय समुदाय, सीमित सैन्य उपस्थिति और प्रशासनिक नेटवर्क मिलकर कैसे सीमा व्यवस्था संभालते थे, यह कहानी सीमांत जीवन को समझने का एक अलग नजरिया देती है।