पर्यटकों के लिए खुली विश्व धरोहर ‘फूलों की घाटी’, 31 अक्टूबर तक कर सकेंगे भ्रमण

विश्व धरोहर फूलों की घाटी पर्यटकों के लिए खुल गई है, लेकिन अभी वहां क्या-क्या देखने को मिल रहा है? कितने फूल खिल चुके हैं, प्रवेश शुल्क कितना है और किस समय घाटी सबसे खूबसूरत दिखती है—जानिए पूरी जानकारी।
उत्तराखंड की फूलों की घाटी में खिलते फूलों और हिमालयी पहाड़ों का दृश्य

उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित विश्व धरोहर फूलों की घाटी सोमवार सुबह पर्यटकों के लिए खोल दी गई। सुबह 8 बजे प्रवेश द्वार खुलने के साथ ही पर्यटक घाटी का भ्रमण कर सकेंगे। अधिकारियों के अनुसार, घाटी में वर्तमान में 20 से अधिक प्रजातियों के फूल खिल चुके हैं।

वन विभाग की टीम हाल ही में घाटी का निरीक्षण कर लौट चुकी है। विभाग के अनुसार, यात्रा व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दे दिया गया है और पर्यटकों की सुविधा के लिए आवश्यक इंतजाम किए गए हैं।

फिलहाल घाटी की यात्रा के लिए ऑफलाइन पंजीकरण की व्यवस्था की गई है। इसके लिए घांघरिया में पंजीकरण कार्यालय संचालित किया जा रहा है। साथ ही सुरक्षा और निगरानी के लिए वन कर्मियों की तैनाती भी की गई है।

प्रशासन ने घाटी में प्रवेश के लिए शुल्क निर्धारित किया है। भारतीय पर्यटकों के लिए प्रवेश शुल्क 200 रुपये प्रति व्यक्ति रखा गया है। भारतीय छात्रों और 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह शुल्क 100 रुपये प्रति व्यक्ति है। विदेशी पर्यटकों को 800 रुपये प्रति व्यक्ति शुल्क देना होगा।

फूलों की घाटी लगभग 87.5 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली हुई है। यह प्रत्येक वर्ष 1 जून से 31 अक्टूबर तक पर्यटकों के लिए खुली रहती है। फूलों की घाटी यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। यहां हिमालयी फूलों की अनेक प्रजातियां, अल्पाइन घास के मैदान और विभिन्न वन्यजीव पाए जाते हैं। वहीं जुलाई और अगस्त के दौरान घाटी में विभिन्न प्रजातियों के फूल बड़ी संख्या में खिलते हैं।

Read also : आरसीबी ने गुजरात टाइटंस को हराकर लगातार दूसरी बार जीता आईपीएल खिताब

अधिकारियों के अनुसार, घाटी में वर्तमान समय में प्रिमुला डेंटिकुलाटा, पोटेंटिला, रोडोडेंड्रोन, कोबरा लिली, स्नेक लिली, कोरिडालिस कश्मीरियाना, आइरिस, मार्श मैरीगोल्ड, थर्मोप्सिस बारबाटा और एनीमोन सहित कई प्रजातियों के फूल दिखाई दे रहे हैं।

नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क प्रशासन ने बताया कि यात्रा सत्र शुरू होने से पहले सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं। पंजीकरण, निगरानी और सुरक्षा से संबंधित इंतजाम भी किए गए हैं।

फूलों की घाटी को वर्ष 1982 में राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया था। बाद में वर्ष 2005 में इसे यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया।

जानकारी के मुताबिक, वर्ष 1931 में ब्रिटिश पर्वतारोही और वनस्पति विशेषज्ञ Frank Smythe कामेट अभियान से लौटते समय इस घाटी तक पहुंचे थे। उन्होंने बाद में अपनी पुस्तक Valley of Flowers के माध्यम से इस क्षेत्र का उल्लेख किया, जिसके बाद फूलों की घाटी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली।

Read also : आईटीबीपी को मिले 133 नए युवा अधिकारी, मसूरी में पासिंग आउट परेड के बाद बल में हुए शामिल