रुद्रप्रयाग, 25 जुलाई। केदारनाथ और बदरीनाथ हाईवे को आपस में जोड़ने वाली रुद्रप्रयाग बाईपास सुरंग और मोटर पुल परियोजना का करीब 99 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। सुरंग बनकर तैयार हो चुकी है, जबकि अलकनंदा नदी पर बनाए जा रहे पुल का शेष काम तेजी से चल रहा है। अधिकारियों ने अगस्त के अंत तक परियोजना को ट्रायल के लिए खोलने की उम्मीद जताई है।
परियोजना के तहत करीब 900.30 मीटर लंबी सुरंग और अलकनंदा नदी पर लगभग 200 मीटर लंबा मोटर पुल बनाया जा रहा है। यह नया मार्ग केदारनाथ की ओर जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-107 को बदरीनाथ की ओर जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-7 से जोड़ेगा।
केंद्र सरकार ने इस परियोजना के लिए करीब ₹156 करोड़ स्वीकृत किए हैं। निर्माण का जिम्मा लोक निर्माण विभाग के राष्ट्रीय राजमार्ग खंड के पास है।
जिलाधिकारी विशाल मिश्रा के अनुसार सुरंग का निर्माण पूरा हो चुका है और पुल का काम अंतिम चरण में है। परियोजना का करीब एक प्रतिशत काम शेष है। पुल की भार क्षमता जांचने के लिए जल्द लोड टेस्ट किया जाएगा।
लोड टेस्ट और दूसरी जरूरी तकनीकी जांच सफल रहने के बाद परियोजना को ट्रायल के लिए खोला जाएगा। इसके बाद सुरक्षा मानकों और विभागीय स्वीकृतियों के आधार पर नियमित यातायात शुरू करने का निर्णय लिया जाएगा।
अधिकारियों ने अगस्त के अंत तक ट्रायल शुरू होने की उम्मीद जताई है। हालांकि इसे नियमित यातायात शुरू होने की तय तारीख नहीं माना जा सकता। अंतिम निर्णय पुल की जांच और सुरक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लिया जाएगा।
रुद्रप्रयाग केदारनाथ और बदरीनाथ यात्रा मार्गों का प्रमुख पड़ाव है। चारधाम यात्रा के दौरान दोनों धामों की ओर जाने वाले वाहनों का दबाव बढ़ने से मुख्य बाजार और आसपास के रास्तों पर अक्सर जाम की स्थिति बनती है।
सुरंग और पुल चालू होने के बाद वाहन रुद्रप्रयाग मुख्य बाजार में प्रवेश किए बिना केदारनाथ हाईवे से बदरीनाथ हाईवे की ओर जा सकेंगे। इसी तरह बदरीनाथ की ओर से आने वाले वाहनों को भी केदारनाथ मार्ग तक पहुंचने के लिए बाजार के भीतर से नहीं गुजरना पड़ेगा।
इससे यात्रा सीजन में मुख्य बाजार पर वाहनों का दबाव कम होने और यात्रियों को जाम से राहत मिलने की उम्मीद है। स्थानीय लोगों, रोजाना आवाजाही करने वाले वाहन चालकों और आपातकालीन सेवाओं के लिए भी नया मार्ग उपयोगी साबित हो सकता है।
लोक निर्माण विभाग का राष्ट्रीय राजमार्ग खंड अब पुल का बचा हुआ काम पूरा करने और लोड टेस्ट की तैयारी में जुटा है। सभी तकनीकी परीक्षण और सुरक्षा प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही परियोजना को नियमित वाहनों की आवाजाही के लिए खोला जाएगा।
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