बदरीनाथ तप्त कुंड में स्नान के दौरान दो महिला श्रद्धालुओं की मौत, राजस्थान से आई थीं धाम

तप्त कुंड में हुई घटना के बाद अब स्नान की उस परंपरा और वहां मौजूद प्राकृतिक गर्म पानी की स्थिति को लेकर भी ध्यान गया है। मंदिर में दर्शन से पहले यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, जबकि इस मामले में मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी। इस धार्मिक स्नान स्थल पर श्रद्धालुओं के लिए कौन-से स्वास्थ्य जोखिम महत्वपूर्ण हो सकते हैं...
Pilgrims gathered outside Badrinath Temple in Uttarakhand

चमोली, 11 सितंबर। बदरीनाथ धाम में तप्त कुंड में स्नान के दौरान राजस्थान की दो महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई। दोनों महिलाएं करीब 100 श्रद्धालुओं के दल के साथ बदरीनाथ यात्रा पर पहुंची थीं। घटना के बाद पुलिस और प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों महिलाएं मंदिर में दर्शन से पहले तप्त कुंड में स्नान करने पहुंची थीं। बताया जा रहा है कि दोनों ने धार्मिक आस्था के तहत 108 डुबकियां लगाने का संकल्प लिया था। इसी दौरान उनकी हालत बिगड़ने की जानकारी सामने आई।

दोनों महिलाओं की मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसका कारण अभी स्पष्ट नहीं है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी।

घटना के बाद दोनों महिलाओं के साथ आए श्रद्धालुओं में शोक का माहौल है। पुलिस अब घटना से जुड़ी परिस्थितियों की जानकारी जुटा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

बदरीनाथ मंदिर के पास स्थित तप्त कुंड एक प्राकृतिक गर्म पानी का स्रोत है। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अनुसार, इसका तापमान करीब 45 डिग्री सेल्सियस रहता है। मंदिर में दर्शन से पहले बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां स्नान करते हैं।

तप्त कुंड बदरीनाथ मंदिर और अलकनंदा नदी के बीच स्थित है। ऊंचाई वाले ठंडे क्षेत्र में होने के बावजूद यहां प्राकृतिक रूप से गर्म पानी निकलता है, जिसके कारण यह बदरीनाथ धाम के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है।

बदरीनाथ धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए तप्त कुंड में स्नान धार्मिक परंपरा का हिस्सा माना जाता है। मंदिर में दर्शन से पहले बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। ऐसे में इस घटना के बाद तप्त कुंड में स्नान के दौरान सावधानी बरतने और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को लेकर भी चिंता बढ़ी है।

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