पहाड़ की ‘नमकवाली’: ₹1,000 से शुरू हुआ सफर बना ₹5 करोड़ का कारोबार, शशि बहुगुणा रतूड़ी की प्रेरक कहानी

उत्तराखंड की उद्यमी शशि बहुगुणा रतूड़ी ने ₹1,000 से शुरू हुए पारंपरिक “पिस्यू लून” के छोटे व्यवसाय को आज करोड़ों के ब्रांड “नमकवाली” में बदल दिया है।
नमकवाली ब्रांड की संस्थापक शशि बहुगुणा रतूड़ी और स्थानीय महिलाएँ

उत्तराखंड की पहाड़ियों से उठी एक साधारण सी पहल आज एक प्रेरक उद्यम कहानी बन चुकी है। शशि बहुगुणा रतूड़ी, जिन्हें आज लोग “नमकवाली” के नाम से जानते हैं, उन्होंने केवल ₹1,000 की पूंजी से शुरू किया गया अपना छोटा सा काम आज करोड़ों रुपये के कारोबार में बदल दिया है।

52 वर्ष की उम्र में शुरू हुई यह यात्रा न केवल एक सफल व्यवसाय की कहानी है, बल्कि पहाड़ की परंपराओं को बचाने और ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का भी उदाहरण बन चुकी है।

पहाड़ की रसोई से निकला एक स्वाद

शशि बहुगुणा रतूड़ी की प्रेरणा का स्रोत रहा उत्तराखंड की पारंपरिक रसोई का एक खास स्वाद – “पिस्यू लून”। यह पहाड़ी नमक पुराने समय से गांवों में घर-घर बनाया जाता था।

महिलाएँ सिलबट्टे पर प्राकृतिक सेंधा नमक, स्थानीय जड़ी-बूटियाँ और मसाले पीसकर इसे तैयार करती थीं। यह पूरी तरह प्राकृतिक और पारंपरिक स्वाद से भरपूर होता था।

लेकिन समय के साथ बाजार में पैक्ड और प्रोसेस्ड उत्पादों की बढ़ती मौजूदगी के कारण यह परंपरा धीरे-धीरे खत्म होने लगी। शशि को लगा कि अगर इस स्वाद को बचाया नहीं गया तो आने वाली पीढ़ियाँ इसे कभी जान ही नहीं पाएंगी।

इसी सोच ने उन्हें एक नई दिशा दी। उनका उद्देश्य था – पहाड़ के इस पारंपरिक स्वाद को देश और दुनिया तक पहुँचाना।

संदेहों के बीच शुरू हुई यात्रा

किसी भी नए व्यवसाय की शुरुआत आसान नहीं होती। शशि के सामने भी कई चुनौतियाँ थीं।

जब उन्होंने अपना काम शुरू किया तो कई लोगों ने उन्हें केवल “एक गृहिणी” कहकर उनकी क्षमता पर सवाल उठाए। लेकिन उन्होंने इन संदेहों को अपनी राह का रोड़ा नहीं बनने दिया।

उन्होंने 52 वर्ष की उम्र में केवल ₹1,000 की पूंजी से अपने उद्यम की शुरुआत की। शुरुआत बेहद साधारण थी – एक सहायक, कुछ कागज़ के पैकेट और उनके बेटे की सोशल मीडिया पर मदद।

सही सामग्री जुटाने के लिए वे कई बार 15 किलोमीटर तक पैदल चलकर जड़ी-बूटियाँ और मसाले लाती थीं। धीरे-धीरे उन्होंने आसपास की महिलाओं को भी इस काम से जोड़ना शुरू किया।

सोशल मीडिया और ‘शार्क टैंक’ से मिला बड़ा मंच

समय के साथ उनके उत्पाद की पहचान बढ़ने लगी। सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम, पर लोगों ने इस पारंपरिक नमक में रुचि दिखानी शुरू की।

इसके बाद ब्रांड के लिए एक वेबसाइट बनाई गई और ऑनलाइन ऑर्डर आने लगे।

नमकवाली की सबसे बड़ी पहचान तब बनी जब शशि बहुगुणा रतूड़ी लोकप्रिय टीवी शो Shark Tank India में दिखाई दीं। निवेशकों को उनका उत्पाद और उसकी कहानी बेहद पसंद आई।

इस शो के बाद ब्रांड की मांग अचानक तेजी से बढ़ गई और नमकवाली पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया।

एक व्यवसाय से बढ़कर सामाजिक पहल

आज नमकवाली केवल एक ब्रांड नहीं, बल्कि एक सामाजिक पहल बन चुकी है।

इस उद्यम ने कई स्तरों पर प्रभाव डाला है:

35 स्थानीय महिलाओं को रोजगार मिला है

500 से अधिक किसानों को जड़ी-बूटियों और मसालों की आपूर्ति से आय का स्रोत मिला है

हर ऑर्डर के साथ एक पेड़ लगाने की पहल भी की जाती है

इस तरह यह उद्यम पहाड़ की अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और समाज तीनों को मजबूती दे रहा है।

परंपरा और उद्यम का संगम

शशि बहुगुणा रतूड़ी का उद्देश्य केवल नमक बेचना नहीं था। वे पहाड़ की उस परंपरा को बचाना चाहती थीं जो धीरे-धीरे खोती जा रही थी।

उनका बेटा सुवेंदु रतूड़ी, जो पहले विदेश में डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर के रूप में काम कर रहा था, बाद में इस उद्यम से जुड़ गया। डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन बिक्री के जरिए उसने इस ब्रांड को नई दिशा दी।

आज नमकवाली के उत्पादों में पारंपरिक फ्लेवर नमक, पहाड़ी मसाले, ड्राई चटनी, पहाड़ी शहद और ए2 बद्री गाय का घी जैसे कई उत्पाद शामिल हैं, जो हिमालयी संस्कृति से जुड़े हैं।

एक संदेश जो दूर तक जाता है

शशि बहुगुणा रतूड़ी की कहानी यह बताती है कि सपने देखने की कोई उम्र नहीं होती।

उन्होंने यह साबित किया कि अगर संकल्प मजबूत हो तो एक गृहिणी भी करोड़ों का उद्यम खड़ा कर सकती है।

आज “नमकवाली” केवल एक ब्रांड नहीं, बल्कि पहाड़ की परंपरा, महिला सशक्तिकरण और स्थानीय उद्यमिता की पहचान बन चुकी है।

यह कहानी उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जो अपने सपनों को उम्र या परिस्थितियों के कारण टाल देते हैं।

क्योंकि कभी-कभी एक छोटी सी शुरुआत भी बड़े बदलाव की कहानी लिख देती है।