उत्तराखंड पूर्ण साक्षर राज्य घोषित, राज्यपाल गुरमीत सिंह ने प्रस्ताव को दी मंजूरी

उत्तराखंड के पूर्ण साक्षर घोषित होने का मतलब केवल एक नई उपलब्धि नहीं है। अब राज्य के सामने इस स्तर को बनाए रखने, डिजिटल और कौशल आधारित शिक्षा को मजबूत करने की चुनौती भी होगी। जानिए, यह बदलाव आम लोगों और भविष्य की शिक्षा व्यवस्था को कैसे प्रभावित करेगा।
Governor Lt Gen Gurmeet Singh signing the approval for Uttarakhand's declaration as a fully literate state alongside the official notification.

देहरादून, 8 जुलाई। उत्तराखंड अब पूर्ण साक्षर राज्य घोषित हो गया है। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने राज्य को पूर्ण साक्षर घोषित करने से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इससे पहले यह प्रस्ताव राज्य कैबिनेट में लाया गया था, जिसके बाद अब राज्यपाल की स्वीकृति के साथ उत्तराखंड ने शिक्षा के क्षेत्र में एक अहम उपलब्धि दर्ज की है।

राज्य सरकार के अनुसार उत्तराखंड ने नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 और ULLAS यानी अंडरस्टैंडिंग लाइफलॉन्ग लर्निंग फॉर ऑल इन सोसाइटी, नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के मानकों को पूरा किया है। इसी आधार पर राज्य को पूर्ण साक्षर घोषित करने की मंजूरी दी गई है।

शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के अनुसार प्रदेश की साक्षरता दर 98 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड ने भारत सरकार के ULLAS कार्यक्रम के तहत तय साक्षरता मानकों को पूरा कर लिया है। इस कार्यक्रम के तहत वयस्कों के लिए बुनियादी साक्षरता, जीवन कौशल, व्यावसायिक कौशल और सतत शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया।

ULLAS कार्यक्रम 15 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोगों की शिक्षा पर केंद्रित है। इसके तहत पढ़ना, लिखना, गणना, जीवन कौशल और सतत सीखने जैसी बुनियादी क्षमताओं को बढ़ाने पर काम किया जाता है। केंद्र सरकार के मानक के अनुसार जब किसी राज्य या केंद्रशासित प्रदेश में साक्षरता दर 95 प्रतिशत या उससे अधिक हो जाती है और गैर-साक्षर लोगों तक शिक्षा पहुंचाने का लक्ष्य पूरा होता है, तब उसे पूर्ण साक्षर माना जाता है।

प्रदेश में इस अभियान के तहत सामाजिक संस्थाओं, कॉरपोरेट इकाइयों और जागरूक नागरिकों के सहयोग से गांवों को गोद लेकर निरक्षर वयस्कों को साक्षर बनाने का काम किया गया। अभियान में महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य वंचित समूहों पर विशेष फोकस किया गया। उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई, जहां महिला साक्षरता दर अपेक्षाकृत कम थी।

उत्तराखंड से पहले मिजोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं। इस तरह उत्तराखंड देश का छठा पूर्ण साक्षर राज्य बन गया है। पहाड़ी और सीमांत क्षेत्रों की भौगोलिक चुनौतियों के बीच वयस्क साक्षरता अभियान को आगे बढ़ाना राज्य के लिए बड़ी चुनौती रहा है।

अब राज्य के सामने पूर्ण साक्षरता की इस स्थिति को बनाए रखने के साथ डिजिटल, वित्तीय और कौशल आधारित शिक्षा को और मजबूत करने की चुनौती होगी। सरकार का कहना है कि ULLAS कार्यक्रम के तहत साक्षरता के साथ-साथ जीवन उपयोगी शिक्षा पर भी जोर दिया गया है, ताकि सीखने की प्रक्रिया केवल पढ़ने-लिखने तक सीमित न रहे।

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