भानियावाला-ऋषिकेश हाईवे परियोजना में 754 पेड़ों का होगा प्रत्यारोपण, 743 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा 20 किमी मार्ग

सड़क चौड़ीकरण के साथ पर्यावरण संरक्षण को संतुलित करने की इस परियोजना में पेड़ों के प्रत्यारोपण, एलीफेंट अंडरपास और अन्य वन्यजीव सुरक्षा उपायों को भी शामिल किया गया है। जानिए, इन व्यवस्थाओं से यात्रियों, स्थानीय लोगों और वन्यजीवों को क्या लाभ मिलने की उम्मीद है।
A mature tree being scientifically transplanted beside the Bhaniyawala–Rishikesh highway expansion with an elevated roadway and elephant underpass in Uttarakhand.

ऋषिकेश, 8 जुलाई। भानियावाला-ऋषिकेश हाईवे परियोजना को वन और वन्यजीवों की सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI भानियावाला-जॉलीग्रांट-ऋषिकेश फोर/सिक्स लेनिंग परियोजना पर काम कर रहा है। करीब 20 किलोमीटर लंबे इस मार्ग को 743 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से HAM मोड पर विकसित किया जा रहा है।

इस परियोजना से देहरादून, जॉलीग्रांट एयरपोर्ट और ऋषिकेश के बीच सड़क संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है। चारधाम यात्रा, पर्यटन और स्थानीय यातायात के बढ़ते दबाव को देखते हुए इस मार्ग को अहम माना जा रहा है। NHAI के अनुसार मौजूदा दो लेन सड़क के वन क्षेत्र वाले हिस्से से रोजाना करीब 18,456 वाहन गुजर रहे हैं। आने वाले समय में यातायात और बढ़ने की संभावना को देखते हुए सड़क चौड़ीकरण को जरूरी बताया गया है।

परियोजना में पर्यावरणीय असर कम करने के लिए डिजाइन में बदलाव किए गए हैं। वन क्षेत्र में पारंपरिक 60 मीटर राइट ऑफ वे की जगह इसे घटाकर 23 मीटर तक सीमित किया गया है, ताकि पेड़ों की कटाई कम हो और सड़क सुरक्षा मानकों को भी बनाए रखा जा सके।

पेड़ों के संरक्षण के लिए Forest Research Institute यानी FRI ने वैज्ञानिक आकलन किया है। इस आकलन में 754 पेड़ों को प्रत्यारोपण के लिए उपयुक्त पाया गया है। इन पेड़ों को मानसून के दौरान दूसरी जगहों पर स्थानांतरित किया जाना है।

वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए भी परियोजना में विशेष प्रबंध रखे गए हैं। NHAI के अनुसार मार्ग पर करीब 3.5 किलोमीटर एलिवेटेड संरचना के साथ एलीफेंट अंडरपास बनाए जाएंगे। इसके अलावा एक मेजर ब्रिज-कम-एलीफेंट अंडरपास और चार समर्पित एलीफेंट अंडरपास का प्रावधान किया गया है।

परियोजना में ग्रीन गाइड हेज, साउंड बैरियर, एंटी-ग्लेयर स्क्रीन, वन्यजीव चेतावनी संकेतक, गति नियंत्रण के उपाय और निर्धारित नो हॉर्न जोन जैसी व्यवस्थाएं भी शामिल की गई हैं। इनका उद्देश्य वन्यजीवों की आवाजाही को सुरक्षित रखना और मानव-वन्यजीव टकराव के खतरे को कम करना है।

यह परियोजना बड़कोट, ऋषिकेश और थानो वन रेंज जैसे संवेदनशील क्षेत्रों से होकर गुजरती है। वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार मौजूदा दो लेन सड़क पर पिछले पांच वर्षों में ऋषिकेश और बड़कोट वन रेंज क्षेत्र में सड़क हादसों में 29 वन्यजीवों की मौत हुई है। इसी वजह से परियोजना में एलिवेटेड स्ट्रक्चर और अंडरपास जैसे वन्यजीव सुरक्षा उपायों को शामिल किया गया है।

NHAI के अनुसार परियोजना जरूरी वैधानिक अनुमतियों के बाद आगे बढ़ाई जा रही है। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने WP(PIL) No. 37 of 2025 की सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट किया कि पेड़ों की कटाई पर कोई निरंतर रोक नहीं है। राज्य सरकार ने पेड़ों की कटाई और प्रत्यारोपण के लिए निर्धारित पर्यावरणीय शर्तों के साथ वर्किंग परमिशन दी है।

परियोजना पूरी होने के बाद देहरादून, जॉलीग्रांट एयरपोर्ट और ऋषिकेश के बीच आवाजाही सुगम होने की उम्मीद है। इससे स्थानीय लोगों, पर्यटकों और चारधाम यात्रियों को बेहतर सड़क संपर्क और सुरक्षित यात्रा सुविधा मिलेगी।

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