देहरादून, 23 सितंबर 2026। उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) के तहत विवाह पंजीकरण से जुड़े नियमों में संशोधन की तैयारी की जा रही है। प्रस्तावित बदलाव लागू होने के बाद यह साफ होगा कि आवेदन के दौरान कौन-कौन सी जानकारियां जरूरी रहेंगी और मौजूदा प्रक्रिया में क्या बदलाव किया जाएगा।
उत्तराखंड में UCC 27 जनवरी 2025 से लागू है। इसके तहत विवाह का पंजीकरण अनिवार्य है। UCC लागू होने के बाद हुए विवाह को सामान्य तौर पर विवाह की तारीख से 60 दिन के भीतर पंजीकृत कराना होता है।
विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया काफी हद तक ऑनलाइन है। आवेदन के दौरान पति-पत्नी से व्यक्तिगत विवरण, वैवाहिक स्थिति और जरूरी दस्तावेज मांगे जाते हैं। मौजूदा नियमों में दोनों पक्षों के माता-पिता या कानूनी अभिभावकों का नाम, पता और संपर्क विवरण देने का भी प्रावधान है।
आवेदन सही पाए जाने पर माता-पिता या अभिभावकों को SMS, WhatsApp या ईमेल के जरिए विवाह पंजीकरण आवेदन की सूचना दिए जाने का प्रावधान भी मौजूदा नियमों में शामिल है।
इसके अलावा आवेदन में पूर्व विवाह, तलाक, जीवनसाथी की मृत्यु, विवाह निरस्तीकरण या पूर्व live-in relationship से जुड़ी जानकारी भी मांगी जा सकती है। सब-रजिस्ट्रार आवेदन और दस्तावेजों की जांच के बाद पंजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाता है।
सरकार इससे पहले भी UCC की कुछ प्रक्रियाओं में बदलाव पर काम कर चुकी है। Aadhaar और live-in registration से जुड़े कुछ प्रावधानों को लेकर भी संशोधन की बात सामने आ चुकी है। अब विवाह पंजीकरण से जुड़े नियमों में भी बदलाव की तैयारी है।
राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार 19 जनवरी 2026 तक UCC के तहत 4,74,447 विवाह पंजीकरण पूरे हो चुके थे। हालांकि यह उस तारीख तक का आंकड़ा है, मौजूदा कुल संख्या इससे अधिक हो सकती है।
अब प्रस्तावित संशोधन की अधिसूचना जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि विवाह पंजीकरण की मौजूदा प्रक्रिया में कौन से नियम बदले जाएंगे और आवेदकों को इससे क्या राहत या नई व्यवस्था मिलेगी।
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