उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ की व्यास घाटी में स्थित भगवान शिव के पवित्र स्थल आदि कैलाश के लिए वार्षिक यात्रा इस वर्ष 8 मई 2026 से शुरू होने वाली है। यात्रा का संचालन कुमाऊँ मंडल विकास निगम लिमिटेड (केएमवीएन) के माध्यम से किया जाएगा, जो इस यात्रा की नोडल एजेंसी है।
तीन स्थानों से शुरू होगी यात्रा
केएमवीएन के महाप्रबंधक विजयनाथ शुक्ला के अनुसार इस वर्ष आदि कैलाश यात्रा के लिए श्रद्धालुओं के कुल 15 समूह बनाए जाएंगे। यह यात्रा राज्य के तीन स्थानों से संचालित की जाएगी:
- हल्द्वानी
- टनकपुर
- धारचूला
इन तीनों स्थानों से यात्रा की अवधि अलग-अलग निर्धारित की गई है।
- हल्द्वानी से यात्रा की अवधि 8 दिन होगी
- टनकपुर से यात्रा 6 दिन में पूरी होगी
- धारचूला से यात्रा 5 दिन में पूरी होगी
यात्रा का पहला चरण 10 जून तक पूरा होने की संभावना है।
अप्रैल के अंत से परमिट जारी होने की संभावना
प्रशासन के अनुसार मौसम की स्थिति अनुकूल रहने पर अप्रैल के अंतिम सप्ताह से इनर लाइन परमिट जारी करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
व्यास घाटी में छियालेख से आगे जाने के लिए इनर लाइन परमिट अनिवार्य है। यह परमिट धारचूला स्थित एसडीएम कार्यालय के माध्यम से जारी किया जाता है।
परमिट प्राप्त करने के लिए यात्रियों को निम्न दस्तावेज प्रस्तुत करने होते हैं:
- आधार कार्ड
- मेडिकल फिटनेस प्रमाण पत्र
- पासपोर्ट आकार के फोटो
परमिट के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी उपलब्ध है।
हाल के वर्षों में बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या
अधिकारियों के अनुसार हाल के वर्षों में आदि कैलाश और ओम पर्वत आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
पहले हर वर्ष लगभग 2,000 श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल होते थे। वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के बाद श्रद्धालुओं की संख्या बढ़कर लगभग 28,000 हो गई।
इसके बाद 2025 में यह संख्या 36,000 से अधिक दर्ज की गई।
सड़क निर्माण से यात्रा हुई सुगम
आदि कैलाश उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के धारचूला क्षेत्र की व्यास घाटी में स्थित है। नवंबर से मार्च के बीच भारी बर्फबारी के कारण इस क्षेत्र में आवाजाही सीमित रहती है।
हाल के वर्षों में सड़क निर्माण होने से यात्री अब धारचूला, गुंजी और जोलिंगकांग तक वाहन से पहुंच सकते हैं। इसके बाद श्रद्धालु आदि कैलाश, पार्वती सरोवर और गौरी कुंड के दर्शन कर सकते हैं।
कैलाश मानसरोवर यात्रा से अलग
आदि कैलाश यात्रा पूरी तरह भारत के भीतर स्थित मार्ग पर होती है, इसलिए इसे अपेक्षाकृत आसान माना जाता है। इसके लिए केवल इनर लाइन परमिट, मेडिकल परीक्षण और स्थानीय प्रशासन की अनुमति आवश्यक होती है।
इसके विपरीत कैलाश मानसरोवर यात्रा तिब्बत क्षेत्र में होने के कारण अंतरराष्ट्रीय यात्रा मानी जाती है, जिसके लिए पासपोर्ट, वीज़ा और अन्य सरकारी प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं।
राज्य प्रशासन और केएमवीएन द्वारा इस वर्ष भी यात्रा को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए तैयारियां की जा रही हैं।




