चारधाम यात्रा के बीच अगले 48 घंटों में खराब मौसम की चेतावनी, श्रद्धालुओं से सावधानी बरतने की अपील

चारधाम यात्रा के बीच उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में अगले 48 घंटों के दौरान भारी बारिश, तेज हवाएं, ओलावृष्टि और भूस्खलन की आशंका को लेकर मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है।
चारधाम यात्रा मौसम अलर्ट के साथ उत्तराखंड का पर्वतीय मार्ग

उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के बीच मौसम एक बार फिर बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। पर्वतीय जिलों में बारिश, गर्जन, ओलावृष्टि, तेज हवाओं और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों से सतर्क रहने और सुरक्षित ढंग से यात्रा करने की अपील की है।

मौसम विज्ञान केंद्र, देहरादून ने 12 मई 2026 को जारी जनपद-स्तरीय मौसम पूर्वानुमान में 12 और 13 मई को उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश, गर्जन के साथ बारिश और 4200 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना जताई है। राज्य के शेष जिलों में भी कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश या गर्जन के साथ बारिश हो सकती है।

मौसम विभाग की चेतावनी के अनुसार 12 और 13 मई को उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों में कहीं-कहीं गर्जन के साथ आकाशीय बिजली और ओलावृष्टि की संभावना है।

इन जिलों में 40 से 50 Km प्रति घंटे की गति से तेज हवाएं चल सकती हैं। साथ ही बारिश के तीव्र से अति तीव्र दौर की भी संभावना जताई गई है। यही जिले चारधाम यात्रा और उच्च हिमालयी मार्गों के लिहाज से बेहद संवेदनशील माने जाते हैं।

राज्य के शेष पर्वतीय जिलों में भी 12 और 13 मई को गर्जन, आकाशीय बिजली, तेज झोंकेदार हवाएं और तीव्र बारिश के दौर की चेतावनी दी गई है। मैदानी जिलों में भी कहीं-कहीं गर्जन, बिजली चमकने और तेज हवाओं की संभावना है।

14 मई को पर्वतीय जिलों में कुछ स्थानों पर बारिश और गर्जन के साथ मौसम खराब रह सकता है, जबकि 15 और 16 मई के लिए कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है।

इसी खराब मौसम को देखते हुए गढ़वाल मंडलायुक्त विनय शंकर पांडेय ने चारधाम यात्रा पर आए श्रद्धालुओं और पर्यटकों से अपील की है कि वे यात्रा के दौरान मौसम की ताजा जानकारी लेते रहें और अपने कार्यक्रम को पूरी सावधानी के साथ बनाएं। उन्होंने विशेष रूप से 12 और 13 मई को यात्रा की योजना बनाते समय अतिरिक्त सतर्कता बरतने को कहा है।

मौसम विभाग ने अपनी एडवाइजरी जारी करते हुए बताया है कि इस तरह के मौसम में कहीं-कहीं आकाशीय बिजली गिरने से जान-माल और पशुधन को नुकसान हो सकता है। झोंकेदार हवाओं से कच्चे या असुरक्षित मकानों को हल्का नुकसान पहुंच सकता है। ओलावृष्टि से बागवानी, वृक्षारोपण और खड़ी फसलों को नुकसान हो सकता है, तथा खुले स्थानों पर लोगों, पशुओं और खुले में खड़े वाहनों को भी क्षति हो सकती है।

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पर्वतीय क्षेत्रों के लिए सबसे बड़ी चिंता भूस्खलन, चट्टान गिरने और सड़क मार्गों के अवरोध होने की रहती है। मौसम विभाग ने संवेदनशील इलाकों में हल्के से मध्यम भूस्खलन, चट्टान गिरने के कारण सड़कों और राजमार्गों में अवरोध या कटाव तथा निचले इलाकों में जलभराव की आशंका जताई है। ऐसी स्थिति में यात्रा मार्गों पर अचानक रुकावट, लंबा जाम या आवाजाही प्रभावित होने की संभावना बढ़ जाती है।

हवाई सेवाओं और हेलीकॉप्टर संचालन पर भी मौसम का असर पड़ सकता है। मौसम विभाग की सलाह के अनुसार खराब मौसम में हवाई अड्डों से आने-जाने वाली उड़ानें और जिलों के विभिन्न हेलीपैडों से हेलीकॉप्टर संचालन प्रभावित हो सकता है।

प्रशासन ने यात्रियों से जिला प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने को कहा है। गढ़वाल मंडलायुक्त ने बताया कि यात्रा पर आने वाले लोगों की सुविधा और सुरक्षा के लिए संबंधित सरकारी विभागों को जरूरी तैयारियां और व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

यात्रियों के लिए सबसे जरूरी सलाह यही है कि खराब मौसम में जल्दबाजी न करें। अगर किसी क्षेत्र में बारिश तेज है, सड़क मार्ग बाधित है या स्थानीय प्रशासन आगे न बढ़ने की सलाह देता है, तो यात्रियों को सुरक्षित स्थान पर रुकना चाहिए। पहाड़ों में कुछ घंटे रुकना कई बार बड़े जोखिम से बचा सकता है।

मौसम विभाग ने चारधाम या राज्य के अन्य स्थानों की यात्रा करने वाले तीर्थयात्रियों और पर्यटकों से सतर्क रहने और यात्रा के दौरान खड़ी ढलानों पर नजर रखने की सलाह दी है। भूस्खलन संभावित क्षेत्रों, नदी-नालों, निचले इलाकों और बाढ़ संभावित जगहों के आसपास रहने या यात्रा करने वाले लोगों को भी सावधानी बरतने को कहा गया है।

श्रद्धालुओं को गर्जन, आकाशीय बिजली, ओलावृष्टि या तेज हवाओं के दौरान खुले स्थानों में रुकने से बचना चाहिए। ऐसे समय सुरक्षित स्थान या पक्के भवन में शरण लेना, पेड़ों के नीचे खड़े न होना, बिजली का संचालन करने वाली वस्तुओं से दूर रहना और वाहन को सुरक्षित जगह पर पार्क करना जरूरी है।

प्रशासन ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों से अपील की है कि वे मौसम चेतावनी को गंभीरता से लें, यात्रा कार्यक्रम सोच-समझकर बनाएं, अनावश्यक जोखिम से बचें और जिला प्रशासन व स्थानीय अधिकारियों के निर्देशों का पूरी तरह पालन करें।

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