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वीर चंद्र सिंह गढ़वाली का चित्र

1930 पेशावर : जब गढ़वाल राइफल्स के एक सैनिक ने गोली चलाने से किया इंकार

गढ़वाल से जुड़े एक सैनिक के जीवन का वह ऐतिहासिक प्रसंग, जहाँ पेशावर में दिए गए सैन्य आदेश के सामने मानवीय संवेदना को प्राथमिकता दी गई और उसका दूरगामी प्रभाव क्या रहा।

उत्तराखंड के हिमालय में स्थित नंदा देवी पर्वत शिखर

नंदा देवी शिखर पर चढ़ाई क्यों प्रतिबंधित है?

नंदा देवी भारत की दूसरी सबसे ऊँची चोटी है, लेकिन इसके मुख्य शिखर पर पर्वतारोहण प्रतिबंधित है। इसके पीछे पर्यावरण संरक्षण, ऐतिहासिक घटनाएँ और हिमालय की संवेदनशील पारिस्थितिकी जैसे कई कारण जुड़े हुए हैं।

अल्मोड़ा के पास स्थित कसार देवी मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार

कसार देवी मंदिर: हिमालय की वह पहाड़ी, जहाँ अध्यात्म और रहस्य साथ दिखाई देते हैं

कसार देवी मंदिर अल्मोड़ा के पास स्थित एक प्राचीन स्थल है जो आस्था, आध्यात्मिक साधना और हिमालयी प्रकृति के लिए जाना जाता है। यह स्थान स्वामी विवेकानंद की यात्रा और भू-चुंबकीय क्षेत्र की चर्चाओं से भी जुड़ा माना जाता है।

टिहरी गढ़वाल जिले में स्थित खैट पर्वत की पहाड़ी और आसपास का हिमालयी दृश्य

खैट पर्वत: टिहरी गढ़वाल की वह पहाड़ी जिसे लोककथाओं में “परियों का देश” कहा जाता है

टिहरी गढ़वाल के घनसाली क्षेत्र के पास स्थित खैट पर्वत गढ़वाल की लोककथाओं में “परियों का देश” के रूप में जाना जाता है, जहाँ प्रकृति, रहस्य और स्थानीय मान्यताओं से जुड़ी कई कहानियाँ सुनाई जाती हैं।

तिलाड़ी कांड के शहीदों की स्मृति में बना स्मारक पत्थर

तिलाड़ी कांड: पहाड़ की वह घटना जिसे “गढ़वाल का जलियांवाला बाग” कहा गया

1930 में उत्तरकाशी के तिलाड़ी मैदान में हुई गोलीबारी की घटना को तिलाड़ी कांड के नाम से जाना जाता है। निहत्थे ग्रामीणों पर हुई इस कार्रवाई को कई लोग “गढ़वाल का जलियांवाला बाग” भी कहते हैं।

उत्तराखंड के चमोली जिले में द्रोणागिरी पर्वत का स्थान दर्शाता बोर्ड

द्रोणागिरी पर्वत का रहस्य: उत्तराखंड का वह गाँव जहाँ हनुमान से जुड़ी एक अनोखी लोकमान्यता सुनाई देती है

चमोली जिले के द्रोणागिरी पर्वत से जुड़ी एक अनोखी लोकमान्यता आज भी स्थानीय लोगों के बीच सुनाई देती है। यह कथा रामायण की संजीवनी बूटी की कहानी से जुड़ी मानी जाती है।

राजुला मालूशाही की कुमाऊँ लोकगाथा से प्रेरित हिमालयी दृश्य

राजुला-मालूशाही: कुमाऊँ की वह प्रेम कथा जिसमें वचन, विरह, साधना और संघर्ष के बाद मिला मिलन

राजुला-मालूशाही कुमाऊँ की प्रसिद्ध लोकगाथा है जो प्रेम, वचन और संघर्ष की कहानी सुनाती है।
यह कथा लोकगीतों और जागरों के माध्यम से पीढ़ियों से उत्तराखंड की लोकसंस्कृति में जीवित है।