WeUttarakhand Staff

टिहरी गढ़वाल जिले में स्थित खैट पर्वत की पहाड़ी और आसपास का हिमालयी दृश्य

खैट पर्वत: टिहरी गढ़वाल की वह पहाड़ी जिसे लोककथाओं में “परियों का देश” कहा जाता है

टिहरी गढ़वाल के घनसाली क्षेत्र के पास स्थित खैट पर्वत गढ़वाल की लोककथाओं में “परियों का देश” के रूप में जाना जाता है, जहाँ प्रकृति, रहस्य और स्थानीय मान्यताओं से जुड़ी कई कहानियाँ सुनाई जाती हैं।

तिलाड़ी कांड के शहीदों की स्मृति में बना स्मारक पत्थर

तिलाड़ी कांड: पहाड़ की वह घटना जिसे “गढ़वाल का जलियांवाला बाग” कहा गया

1930 में उत्तरकाशी के तिलाड़ी मैदान में हुई गोलीबारी की घटना को तिलाड़ी कांड के नाम से जाना जाता है। निहत्थे ग्रामीणों पर हुई इस कार्रवाई को कई लोग “गढ़वाल का जलियांवाला बाग” भी कहते हैं।

देहरादून के घंटाघर क्षेत्र का सड़क दृश्य

90 के दशक का देहरादून: एक शांत शहर और अपनेपन से भरी ज़िंदगी

90 के दशक का देहरादून एक शांत, धीमी रफ्तार और अपनापन भरा शहर था। उस दौर की गलियाँ, मोहल्ले और रिश्ते आज भी लोगों की यादों में बसे हुए हैं।

चमोली जिले के वाण गाँव में स्थित लाटू देवता मंदिर की पूजा परंपरा

लाटू देवता: उत्तराखंड के उस देवता की कहानी, जिनके मंदिर में पुजारी भी आँखों पर पट्टी बाँधकर प्रवेश करता है

चमोली जिले के वाण गाँव में स्थित लाटू देवता का मंदिर उत्तराखंड की एक अनोखी धार्मिक परंपरा के लिए प्रसिद्ध है, जहाँ गर्भगृह में प्रवेश करते समय पुजारी भी आँखों पर पट्टी बाँधता है।

उत्तराखंड के चमोली जिले में द्रोणागिरी पर्वत का स्थान दर्शाता बोर्ड

द्रोणागिरी पर्वत का रहस्य: उत्तराखंड का वह गाँव जहाँ हनुमान से जुड़ी एक अनोखी लोकमान्यता सुनाई देती है

चमोली जिले के द्रोणागिरी पर्वत से जुड़ी एक अनोखी लोकमान्यता आज भी स्थानीय लोगों के बीच सुनाई देती है। यह कथा रामायण की संजीवनी बूटी की कहानी से जुड़ी मानी जाती है।

उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित रूपकुंड झील

रूपकुंड: हिमालय की वह रहस्यमयी झील जहाँ मिले सैकड़ों मानव

चमोली जिले में स्थित रूपकुंड झील को “स्केलेटन लेक” के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यहाँ बर्फ पिघलने पर सैकड़ों मानव कंकाल दिखाई देते हैं। यह रहस्य आज भी वैज्ञानिकों और इतिहासकारों को आकर्षित करता है।

राजुला मालूशाही की कुमाऊँ लोकगाथा से प्रेरित हिमालयी दृश्य

राजुला-मालूशाही: कुमाऊँ की वह प्रेम कथा जिसमें वचन, विरह, साधना और संघर्ष के बाद मिला मिलन

राजुला-मालूशाही कुमाऊँ की प्रसिद्ध लोकगाथा है जो प्रेम, वचन और संघर्ष की कहानी सुनाती है।
यह कथा लोकगीतों और जागरों के माध्यम से पीढ़ियों से उत्तराखंड की लोकसंस्कृति में जीवित है।

उत्तराखंड के पहाड़ी गाँव में राशन की दुकान के बाहर खड़े ग्रामीण और भीतर बैठे दुकानदार का यथार्थ दृश्य

राशन की दुकान और उधार की कॉपी

एक पहाड़ी गाँव की वह छोटी-सी दुकान, जहाँ जरूरत के समय हिसाब से पहले भरोसा लिखा जाता था। वहाँ उधार केवल लेन-देन नहीं था, बल्कि सामाजिक संबंधों और आपसी उत्तरदायित्व की एक मौन परंपरा थी।

परीक्षा केंद्र के बाहर प्रवेश से पहले खड़े प्रतियोगी परीक्षा के अभ्यर्थी

पहाड़ का युवा और प्रतियोगी परीक्षाएँ : अवसर की डगर या दबाव का बोझ?

पहाड़ का युवा वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में समय, ऊर्जा और उम्मीद लगाता है। यह मार्ग कई बार अवसर का द्वार बनता है, तो कई बार अनिश्चितता और सामाजिक अपेक्षाओं का दबाव भी साथ लाता है।