हमारी बात

देहरादून की सड़क पर चलती सिटी बस और आसपास दिखाई देता पुराना शहरी माहौल।

देहरादून : एक शहर, जो यादों में अब भी पुराना है

कभी नकरौंदा के आसपास गन्ने के खेत थे, सिटी बसें कम थीं और सोंग नदी गर्मियों की छुट्टियों का सबसे पसंदीदा ठिकाना हुआ करती थी। लगभग दो दशकों में देहरादून बहुत बदल गया, लेकिन कुछ यादें आज भी वहीं खड़ी हैं जहां उन्हें छोड़ा था। इस लेख में उसी पुराने देहरादून का एक स्मृति-सफर।

पर्यटन, सेना और तकनीक आधारित आजीविका से जुड़े पहाड़ी युवाओं का प्रतिनिधिक दृश्य

पहाड़ का भविष्य: पर्यटन, सेना या टेक्नोलॉजी?

रोजगार की तलाश में पहाड़ का युवा लंबे समय तक कुछ तय रास्तों तक सीमित रहा, लेकिन बदलते समय के साथ नए विकल्प भी सामने आ रहे हैं। इस लेख के माध्यम से उस बड़े सवाल को समझने की कोशिश की गई है कि आने वाले वर्षों में पहाड़ की अर्थव्यवस्था और युवाओं की दिशा किस संतुलन पर टिक सकती है।

पहाड़ी गाँव की राशन दुकान में उधार की कॉपी देखते दुकानदार और हिसाब चुकता करते बुजुर्ग ग्रामीण का दृश्य

राशन की दुकान और उधार की कॉपी

एक पहाड़ी गाँव की वह छोटी-सी दुकान, जहाँ जरूरत के समय हिसाब से पहले भरोसा लिखा जाता था। वहाँ उधार केवल लेन-देन नहीं था, बल्कि सामाजिक संबंधों और आपसी उत्तरदायित्व की एक मौन परंपरा थी।

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के बीच अवसर और दबाव के बीच खड़ा उत्तराखंड का युवा दर्शाता दृश्य

पहाड़ का युवा और प्रतियोगी परीक्षाएँ : अवसर की डगर या दबाव का बोझ?

पहाड़ का युवा वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में समय, ऊर्जा और उम्मीद लगाता है। यह मार्ग कई बार अवसर का द्वार बनता है, तो कई बार अनिश्चितता और सामाजिक अपेक्षाओं का दबाव भी साथ लाता है।