
चोपता : खूबसूरत गुलाबी बुराँश का अद्भुत संसार
वसंत में जब चोपता के ढलानों पर बुराँश खिलता है, तो वह केवल जंगल को रंग नहीं देता;
वह उस हिमालयी संतुलन को उजागर करता है जिस पर यह पूरा पारिस्थितिक तंत्र टिका है।

वसंत में जब चोपता के ढलानों पर बुराँश खिलता है, तो वह केवल जंगल को रंग नहीं देता;
वह उस हिमालयी संतुलन को उजागर करता है जिस पर यह पूरा पारिस्थितिक तंत्र टिका है।

पहाड़ में किसी धारा का जीवित रहना केवल वर्षा पर निर्भर नहीं होता। बाँज के जंगल, मिट्टी की संरचना और मानवीय हस्तक्षेप मिलकर उस जल चक्र को आकार देते हैं, जिस पर गाँवों का अस्तित्व टिका रहता है।