उत्तराखंड में बन रही ऋषिकेश–कर्णप्रयाग नई रेल लाइन परियोजना का निर्माण कार्य मार्च 2026 तक 73.5 प्रतिशत पूरा हो चुका है। यह जानकारी ताजा सरकारी आंकड़ों में सामने आई है।
125 Km लंबी ये रेल लाइन हिमालयी क्षेत्र की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण देश की सबसे चुनौतीपूर्ण रेलवे परियोजनाओं में से एक मानी जाती है। इस परियोजना की कुल लागत ₹38,953 करोड़ निर्धारित की गई है।
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की मार्च महीने की रिपोर्ट के अनुसार, परियोजना का काम लगातार आगे बढ़ रहा है और अब यह 73.5 प्रतिशत तक पहुंच चुका है।
अब तक कुल लागत ₹38,953 करोड़ में से लगभग ₹28,269 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं। यह 125 Km लंबी ब्रॉड-गेज लाइन गढ़वाल हिमालय क्षेत्र को हर मौसम में रेल से जोड़ने और सीमावर्ती इलाकों तक पहुंच मजबूत करने के उद्देश्य से तैयार की जा रही है।
इस परियोजना में उत्तराखंड के भूकंपीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर सुरंगों, पुलों और पहाड़ी इंजीनियरिंग कार्य किए जा रहे हैं।
परियोजना के तहत 104 Km लंबाई की 16 मुख्य सुरंगें और करीब 98 Km लंबाई की 12 निकासी सुरंगें बनाई जा रही हैं।
रेल मंत्रालय के अनुसार, अब तक 99 Km लंबाई की मुख्य सुरंगें और 94 Km से अधिक लंबाई की 9 निकासी सुरंगों का निर्माण पूरा हो चुका है।
यह रेल लाइन गढ़वाल क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी परियोजना है, जो आम लोगों की आवाजाही को आसान बनाने के साथ-साथ रणनीतिक दृष्टि से भी अहम मानी जाती है।
इस परियोजना को लागू करने वाली एजेंसी रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) के अनुसार, निर्माण कार्य तेज गति से चल रहा है और इसे दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
परियोजना पूरी होने के बाद ऋषिकेश से देवप्रयाग, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग और कर्णप्रयाग जैसे प्रमुख शहरों तक सीधी रेल कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे यात्रा समय कम होगा और उत्तराखंड के प्रमुख तीर्थ स्थलों व दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच बेहतर होगी।
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