देहरादून 20 अगस्त। उत्तराखंड जैसे आपदा संवेदनशील राज्य में किसी बड़ी प्राकृतिक आपदा, महामारी या अचानक पैदा हुई स्वास्थ्य आपात स्थिति के दौरान सबसे बड़ी चुनौती केवल राहत पहुंचाना नहीं होती, बल्कि यह तय करना भी होता है कि किस जिले में कितने मरीज हैं, कहां डॉक्टर और दवाइयों की जरूरत है, कौन-सा अस्पताल दबाव में है और किस इलाके में स्वास्थ्य सेवाओं को तुरंत मजबूत करना है।
इसी जरूरत को देखते हुए देहरादून स्थित स्वास्थ्य महानिदेशालय में हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (Health Emergency Operation Centre-HEOC) तैयार किया गया है। राज्य सरकार के सूचना एवं लोक संपर्क विभाग की ओर से साझा जानकारी के अनुसार यह केंद्र किसी भी आपदा, महामारी या आपातकालीन स्वास्थ्य समस्या के दौरान स्वास्थ्य विभाग की गतिविधियों को एक जगह से समन्वित करने में मदद करेगा।
उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां इसे इस तरह की व्यवस्था की जरूरत वाला राज्य बनाती हैं। भूस्खलन, अचानक बाढ़, बादल फटना, हिमस्खलन और भूकंप जैसी घटनाओं के साथ राज्य को कई बार दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की चुनौती का सामना करना पड़ता है। ऐसे हालात में कई विभाग, जिला प्रशासन, अस्पताल, एंबुलेंस सेवाएं और स्वास्थ्य टीमें एक साथ काम करती हैं। HEOC इसी समन्वय को तेज और व्यवस्थित करने के लिए केंद्रीय केंद्र की भूमिका निभाएगा।
केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने उत्तराखंड में HEOC स्थापित करने को पहले मंजूरी दी थी। इसे प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (PM-ABHIM) के तहत विकसित किया गया है। इस मॉडल का उद्देश्य राज्यों की ऐसी स्वास्थ्य आपात स्थितियों से निपटने की क्षमता बढ़ाना है, जिनमें तेजी से जानकारी जुटाने, विश्लेषण करने और अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल की जरूरत पड़ती है।
HEOC सामान्य दिनों में भी स्वास्थ्य संबंधी आपात तैयारियों की निगरानी और संबंधित व्यवस्थाओं को मजबूत करने में उपयोगी होगा। किसी महामारी या बड़े स्वास्थ्य संकट के समय इसे सक्रिय कर अलग-अलग जिलों से आने वाली सूचनाओं को एक जगह जुटाया जा सकेगा। इससे प्रभावित क्षेत्रों, मरीजों की स्थिति, अस्पतालों की क्षमता, मानव संसाधन और जरूरी स्वास्थ्य सामग्री से जुड़ी जानकारी के आधार पर तेजी से निर्णय लेने में मदद मिलेगी।
देश में सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों के लिए इसी तरह के ऑपरेशन सेंटर का इस्तेमाल पहले भी किया जाता रहा है। राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) के अनुसार केंद्रीय स्तर का पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर हाल के वर्षों में निपाह, तीव्र डायरिया, हेपेटाइटिस और दूसरी स्वास्थ्य आपात स्थितियों के दौरान सक्रिय किया गया है। इसका काम अलग-अलग एजेंसियों के बीच समन्वय और त्वरित स्वास्थ्य प्रतिक्रिया को मजबूत करना है।
आपदा के समय इस तरह का केंद्र खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण होगा क्योंकि उत्तराखंड में कई प्रभावित क्षेत्र सड़क संपर्क टूटने या खराब मौसम के कारण मुख्य स्वास्थ्य केंद्रों से कट सकते हैं। ऐसी स्थिति में राज्य स्तर पर उपलब्ध स्वास्थ्य संसाधनों की स्पष्ट तस्वीर और जिलों के साथ लगातार संपर्क राहत और उपचार की गति को बेहतर कर सकता है।
HEOC का मकसद किसी आपदा को रोकना नहीं, बल्कि आपदा के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की प्रतिक्रिया को ज्यादा तेज, समन्वित और व्यवस्थित बनाना है। राज्य में यह व्यवस्था पूरी क्षमता से काम करती है तो किसी महामारी, प्राकृतिक आपदा या बड़े स्वास्थ्य संकट के समय मरीजों, अस्पतालों और स्वास्थ्य टीमों से जुड़ी जरूरी जानकारी एक ही केंद्र से संभाली जा सकेगी।
उत्तराखंड के लिए इसकी सबसे बड़ी अहमियत भी यही है—जहां आपदा कई बार अचानक आती है और कई इलाकों तक पहुंचना मुश्किल होता है, वहां स्वास्थ्य विभाग के पास अब ऐसी केंद्रीय व्यवस्था होगी जो संकट के समय अलग-अलग स्वास्थ्य सेवाओं को एक साथ जोड़ सकेगी।
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