चंपावत। कैलाश मानसरोवर यात्रा का पहला दल 5 जुलाई को टनकपुर टीआरसी से रवाना होगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी यात्रियों के दल को हरी झंडी दिखाएंगे। यात्रा को लेकर टनकपुर में तैयारियां तेज कर दी गई हैं।
इस बार कैलाश मानसरोवर यात्रा में कुल 10 दल रवाना होंगे। प्रत्येक दल में करीब 50 श्रद्धालु शामिल रहेंगे। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, 2026 की कैलाश मानसरोवर यात्रा लिपुलेख दर्रा और नाथुला दर्रा मार्ग से आयोजित की जा रही है। लिपुलेख मार्ग उत्तराखंड से होकर जाता है।
टनकपुर टीआरसी(Tourist Rest House Camp) इस यात्रा का अहम पड़ाव रहेगा। यहां यात्रियों के ठहरने, भोजन और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं को लेकर तैयारी की जा रही है। यात्रा दल टनकपुर से आगे कुमाऊं मंडल के सीमांत क्षेत्रों की ओर बढ़ेगा और निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद लिपुलेख मार्ग से आगे जाएगा।
कैलाश मानसरोवर यात्रा धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह यात्रा भारत सरकार के विदेश मंत्रालय की ओर से चीन सरकार के समन्वय से आयोजित की जाती है। यात्रा में शामिल होने के लिए पात्र भारतीय नागरिकों के पास वैध भारतीय पासपोर्ट होना जरूरी है।
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यात्रा के दौरान ऊंचाई वाले कठिन भूभाग, मौसम और अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़ी औपचारिकताओं को देखते हुए श्रद्धालुओं के लिए स्वास्थ्य, दस्तावेज और सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन जरूरी रहेगा। विदेश मंत्रालय ने हाल में श्रद्धालुओं को अधूरे दस्तावेजों के साथ यात्रा शुरू नहीं करने की सलाह भी दी है।
टनकपुर में पहले दल के स्वागत और प्रस्थान को लेकर प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से तैयारी की जा रही है। यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा और यात्रा मार्ग पर समन्वय बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
फिलहाल 5 जुलाई को मुख्यमंत्री की मौजूदगी में पहले दल को रवाना किए जाने के साथ कैलाश मानसरोवर यात्रा का टनकपुर चरण औपचारिक रूप से शुरू होगा।
यात्रा शुरू होने से टनकपुर और चंपावत क्षेत्र में भी धार्मिक पर्यटन की गतिविधियां बढ़ेंगी। श्रद्धालुओं के आगमन से स्थानीय होटल, परिवहन, भोजनालय और छोटे कारोबारियों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। प्रशासन के लिए चुनौती यह रहेगी कि यात्रियों की सुविधा के साथ मार्ग पर सुरक्षा, स्वास्थ्य सहायता और मौसम संबंधी सतर्कता व्यवस्था लगातार बनी रहे।
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