देहरादून। उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन तैयारियों को और मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। राज्य आपदा प्रबंधन योजना को लेकर आपदा सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि इस मॉड्यूल के माध्यम से तैयारियों को मजबूत किया जा रहा है, ताकि आपदा की स्थिति में विभागों के बीच बेहतर तालमेल, प्रभावी संचार और तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
आपदा सचिव ने कहा कि कोशिश यह है कि किसी वास्तविक आपदा के समय राहत और बचाव कार्य अधिक प्रभावी ढंग से किए जा सकें। इसके लिए आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक उपकरणों के बेहतर उपयोग पर भी ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आपदा के समय सूचना का तेज आदान-प्रदान और विभागों के बीच तालमेल बेहद जरूरी होता है।
उत्तराखंड भौगोलिक रूप से संवेदनशील राज्य है। पर्वतीय क्षेत्रों में भारी बारिश, भूस्खलन, सड़क बाधित होने, नदी-नालों के उफान और अचानक मौसम बदलने जैसी स्थितियां अक्सर चुनौती बनती हैं। ऐसे में आपदा प्रबंधन योजना को जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करना प्रशासन की प्राथमिकता में शामिल है।
आपदा सचिव के अनुसार, तैयारी का मकसद सिर्फ योजना बनाना नहीं, बल्कि आपात स्थिति में उसका तेजी और सही तरीके से इस्तेमाल सुनिश्चित करना है। इसके लिए संचार व्यवस्था, वैज्ञानिक उपकरणों के उपयोग और अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय को मजबूत किया जा रहा है।
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आधुनिक तकनीक की मदद से आपदा की स्थिति में प्रभावित क्षेत्रों की जानकारी तेजी से जुटाई जा सकती है। इससे राहत और बचाव टीमों को समय पर निर्णय लेने, संसाधनों को सही जगह भेजने और प्रभावित लोगों तक जल्द सहायता पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
मानसून सीजन में राज्य आपदा प्रबंधन तंत्र की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है। बारिश के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन, जलभराव, नदी-नालों में अचानक पानी बढ़ने और मार्ग बाधित होने की घटनाएं सामने आती हैं। ऐसे में स्थानीय प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग और संबंधित एजेंसियों के बीच तालमेल बेहद जरूरी है।
फिलहाल आपदा प्रबंधन विभाग का जोर तैयारियों को तकनीक आधारित और समन्वित बनाने पर है। विभाग की कोशिश है कि किसी भी आपात स्थिति में प्रतिक्रिया तेज हो, संचार व्यवस्था प्रभावी रहे और राहत-बचाव कार्यों को बेहतर तरीके से अंजाम दिया जा सके।
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