हरिद्वार। श्रावण कांवड़ मेला 2026 को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सुगम बनाने के लिए हरिद्वार में तैयारियां तेज कर दी गई हैं। मेले की व्यवस्थाओं को लेकर सीसीआर सभागार में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक हुई, जिसमें विभागों को तय समयसीमा के भीतर सभी काम पूरे करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में दिए गए निर्देशों के अनुसार, हरिद्वार के प्रभारी मंत्री सतपाल महाराज ने अधिकारियों से कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान सहित पड़ोसी राज्यों के साथ प्रभावी समन्वय बनाया जाए। उन्होंने सुरक्षा, यातायात और श्रद्धालुओं की निर्बाध आवाजाही को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
बैठक में सतपाल महाराज ने कहा कि हरिद्वार आने वाले लाखों कांवड़ यात्रियों की सुरक्षा, सुविधा और सम्मान सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कांवड़ मार्गों पर पेयजल, शौचालय, स्वच्छता, चिकित्सा, विद्युत, प्रकाश व्यवस्था और विश्राम स्थलों जैसी मूलभूत सुविधाएं समय रहते उपलब्ध कराने को कहा।
प्रभारी मंत्री ने व्यवस्थाओं का पूर्व परीक्षण कराने के भी निर्देश दिए, ताकि मेला शुरू होने से पहले कमियों को दूर किया जा सके। उन्होंने कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं पर हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा की व्यवस्था सुनिश्चित करने को भी कहा।
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बैठक में परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा ने कहा कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ काम करें। उन्होंने यातायात प्रबंधन, पार्किंग, डायवर्जन और भीड़ नियंत्रण की कार्ययोजना का समय रहते परीक्षण करने पर जोर दिया, ताकि जरूरत पड़ने पर समय रहते सुधार किया जा सके।
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने बैठक में विभागवार तैयारियों का प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बताया कि सभी कार्य निर्धारित समयसीमा में पूरे करने के लिए विभाग समन्वित रूप से काम कर रहे हैं। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर और एसपी ट्रैफिक निशा यादव ने सुरक्षा, कानून व्यवस्था, पार्किंग, डायवर्जन और संवेदनशील स्थलों की निगरानी से जुड़ी कार्ययोजना की जानकारी दी।
गढ़वाल आयुक्त आनंद स्वरूप ने अधिकारियों को आपसी तालमेल के साथ सभी व्यवस्थाएं तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए। बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी, मेयर किरण जैसल, विधायक आदेश चौहान, रवि बहादुर, ममता राकेश, वीरेंद्र जातव, फुरकान अहमद, भाजपा जिलाध्यक्ष आशुतोष शर्मा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
कांवड़ यात्रा में लाखों शिवभक्त हरिद्वार पहुंचकर गंगाजल लेते हैं। ऐसे में प्रशासन के लिए सुरक्षा, यातायात, स्वास्थ्य, सफाई और भीड़ प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती रहती है। मेले से पहले तैयारियों का परीक्षण और पड़ोसी राज्यों के साथ समन्वय इसी चुनौती को देखते हुए अहम माना जा रहा है।
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