देहरादून। अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद उत्तराखंड में श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अधीन आने वाले मंदिरों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। समिति ने दान-दक्षिणा, चढ़ावे और आय के अन्य स्रोतों के प्रबंधन को लेकर कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
समिति से जुड़ी जानकारी के अनुसार, बीकेटीसी ने मंदिरों में चढ़ावे और दान की निगरानी को लेकर अधिकारियों और कर्मचारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। समिति का जोर इस बात पर है कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े दान और चढ़ावे का हिसाब-किताब पूरी पारदर्शिता के साथ रखा जाए।
बीकेटीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सोहन सिंह की ओर से जारी आदेश में बदरीनाथ, केदारनाथ और समिति के अधीन आने वाले अन्य मंदिरों में तैनात अधिकारियों-कर्मचारियों को सावधानी बरतने को कहा गया है। दान और चढ़ावा गिनने वाले केंद्रों, अकाउंट्स ब्रांच, ट्रेजरी सेक्शन, गेस्ट हाउस और पूजा काउंटरों पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
आदेश में कहा गया है कि नकद दान, दान की गई सामग्री और मंदिरों में आने वाले चढ़ावे के प्रबंधन में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। कर्मचारियों को दान-दक्षिणा से जुड़े हर काम में तय नियमों का पालन करने और रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखने के निर्देश दिए गए हैं।
यह भी पढ़ें: उत्तराखंड के कई जिलों में अगले 5 दिन भारी बारिश का अलर्ट, पहाड़ों में तेज बारिश और बिजली गिरने की चेतावनी
अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले के बाद धार्मिक स्थलों पर दान व्यवस्था की पारदर्शिता को लेकर चर्चा तेज हुई है। इसी को देखते हुए बीकेटीसी ने अपने अधीन आने वाले मंदिरों में व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में कदम उठाया है।
बदरीनाथ और केदारनाथ धाम में हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यात्रा सीजन के दौरान मंदिरों में चढ़ावा और दान की मात्रा भी बढ़ जाती है। ऐसे में दान संग्रह, गिनती, सुरक्षा और रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था को मजबूत करना समिति के लिए अहम माना जा रहा है।
बीकेटीसी की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, समिति बदरीनाथ और केदारनाथ मंदिरों के साथ उत्तराखंड के 45 अन्य मंदिरों का प्रबंधन करती है। इसलिए समिति के निर्देशों के बाद संबंधित मंदिरों और कार्यालयों में तैनात कर्मचारियों की जिम्मेदारी और बढ़ गई है।
समिति का कहना है कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े दान और चढ़ावे का प्रबंधन सुरक्षित, पारदर्शी और नियमों के अनुसार होना चाहिए। निर्देशों के बाद मंदिरों में दान-चढ़ावे की निगरानी, गिनती और रिकॉर्ड व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
यह भी पढ़ें: देहरादून-हरिद्वार हाईवे पर चलते ट्रक में लगी आग, चालक ने सूझबूझ से बचाई जान




