उत्तराखंड की सहकारी परियोजना पर उठे सवाल, 1.47 करोड़ के कथित गबन में नैकॉफ(NACOF) के खिलाफ शिकायत

शिकायत में 1.47 करोड़ रुपये के कथित गबन का आरोप लगाया गया है, लेकिन अब तक मुकदमा दर्ज नहीं होने की बात सामने आई है। यह परियोजना किन गतिविधियों से जुड़ी है, शिकायत में क्या आरोप हैं और आगे की जांच प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ सकती है, जानिए।
A hand holding multiple bundles of Indian currency notes used as a representative visual for an alleged financial irregularity investigation.

देहरादून, 7 जुलाई 2026। उत्तराखंड की राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना में 1.47 करोड़ रुपये के कथित गबन का मामला सामने आया है। सामने आई जानकारी के अनुसार, इस मामले में नैकॉफ (NACOF) के खिलाफ पुलिस को शिकायत दी गई है, लेकिन शिकायत के पांच दिन बाद तक मुकदमा दर्ज नहीं होने की बात कही गई है।

मामला सहकारिता विभाग से जुड़ी राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना का बताया जा रहा है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि परियोजना से जुड़े कार्यों में वित्तीय अनियमितता हुई और 1.47 करोड़ रुपये की राशि का गबन किया गया। फिलहाल मामला आरोपों और शिकायत के स्तर पर है। जांच के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट होगी।

राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना उत्तराखंड में सहकारी संस्थाओं और समिति सदस्यों से जुड़ी महत्वपूर्ण योजना है। सहकारिता विभाग के अनुसार, इस परियोजना का उद्देश्य क्लस्टर आधारित कृषि और सहवर्ती उत्पादन को बढ़ाना, उत्पादों के प्रसंस्करण, भंडारण और विपणन की व्यवस्था करना और किसानों को उचित मूल्य दिलाना है।

परियोजना के तहत सेब उद्यानीकरण, मौसमी और बेमौसमी सब्जी उत्पादन, मसाले और जड़ी-बूटी उत्पादन, मधुमक्खी पालन, आलू बीज उत्पादन, डेमस्क रोज, मुर्गीपालन, लेमनग्रास, मशरूम उत्पादन और विपणन केंद्र जैसी गतिविधियां शामिल हैं। ऐसे में परियोजना से जुड़े वित्तीय आरोपों को गंभीर माना जा रहा है।

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नैकॉफ यानी National Federation of Farmers’ Procurement, Processing and Retailing Cooperatives of India Ltd. एक बहु-राज्य सहकारी संस्था है। इसकी आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, यह संस्था Multi-State Cooperative Societies Act, 2002 के तहत स्थापित है। शिकायत में इसी संस्था से जुड़े स्तर पर गड़बड़ी के आरोप लगाए गए हैं।

प्रकरण से जुड़ी जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि FIR दर्ज नहीं होने से मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई अटकी हुई है। उनका कहना है कि मुकदमा दर्ज होने के बाद ही दस्तावेजों, भुगतान, कार्यादेश और परियोजना से जुड़े रिकॉर्ड की विस्तृत जांच आगे बढ़ सकेगी।

इस तरह के मामलों में पुलिस जांच के दौरान यह देखा जाता है कि राशि का इस्तेमाल नियमों और स्वीकृत कार्यों के अनुसार हुआ या नहीं। भुगतान प्रक्रिया, कार्य निष्पादन, बिल-वाउचर और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाता है कि गड़बड़ी हुई है या नहीं।

फिलहाल पूरा मामला पुलिस कार्रवाई और जांच प्रक्रिया पर टिका है। सहकारी परियोजना से जुड़े इस आरोप ने विभागीय निगरानी और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े किए हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि पुलिस शिकायत पर मुकदमा दर्ज करती है या पहले प्रारंभिक जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाती है।

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