हर्षिल में भागीरथी के कटाव से बढ़ा खतरा, आठ भवन खाली; पुलिस स्टेशन अस्थायी रूप से शिफ्ट

लगातार बढ़ते कटाव ने केवल नदी किनारे की जमीन ही नहीं, बल्कि लोगों के घरों, पर्यटन ढांचे और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। जानिए, हर्षिल में हालात क्यों बिगड़े, किन इलाकों पर सबसे ज्यादा खतरा है और प्रशासन क्या कदम उठा रहा है।
The swollen Bhagirathi River flowing close to riverside buildings in Harsil amid heavy monsoon conditions in Uttarkashi.

उत्तरकाशी, 9 जुलाई। उत्तरकाशी जिले के हर्षिल क्षेत्र में लगातार बारिश और भागीरथी नदी के बढ़ते जलस्तर ने चिंता बढ़ा दी है। नदी के तेज बहाव और कटाव के कारण GMVN गेस्ट हाउस, हर्षिल पुलिस स्टेशन, होटल, होमस्टे, आवासीय भवन और सेब के बगीचे खतरे की जद में आ गए हैं। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने एहतियातन आठ भवन खाली करा दिए हैं।

शुक्रवार को भागीरथी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया। नदी को नियंत्रित करने के लिए लगाए गए मलबे का हिस्सा तेज बहाव में बह गया, जिससे पानी आबादी वाले क्षेत्र की ओर मुड़ने लगा। इस दौरान GMVN गेस्ट हाउस का एक टिन शेड भी बह गया।

इसके बाद नदी किनारे स्थित हर्षिल पुलिस स्टेशन, कुछ आवासीय भवनों और सेब के बगीचों पर कटाव का खतरा और बढ़ गया। भागीरथी का बहाव आबादी की ओर बढ़ने से स्थानीय लोग डरे हुए हैं। हर्षिल जिला मुख्यालय उत्तरकाशी से करीब 80 किलोमीटर दूर स्थित है और यहां के लोग लगातार नदी के जलस्तर पर नजर बनाए हुए हैं।

बारिश के कारण सिंचाई विभाग की ओर से किए जा रहे सुरक्षा कार्यों को भी नुकसान पहुंचा है। नदी ने हर्षिल की सुरक्षा के लिए बनाई जा रही वायर क्रेट दीवार को नुकसान पहुंचाया। विभाग अब आर्मी कैंप की ओर से मशीन लगाकर नदी के चैनलाइजेशन और सुरक्षा कार्यों को तेज कर रहा है।

सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता सचिन सिंघल के अनुसार, बाढ़ सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए नदी को नियंत्रित करने का काम किया जा रहा है। किनारों पर वायर क्रेट लगाए जा रहे हैं, ताकि हर्षिल क्षेत्र को नुकसान से बचाया जा सके।

बताया जा रहा है कि क्षेत्र में करीब 10.24 करोड़ रुपये की लागत से सुरक्षा कार्य प्रस्तावित है। इसमें एप्रोच रोड और करीब 500 मीटर लंबी RCC दीवार का निर्माण शामिल है। हालांकि टेंडर प्रक्रिया में देरी के कारण काम समय पर शुरू नहीं हो पाया।

GMVN गेस्ट हाउस की नींव के पास बड़ी दरारें आने से भवन पर खतरा बना हुआ है। सुरक्षा कारणों से हर्षिल पुलिस स्टेशन को भी अस्थायी रूप से PWD गेस्ट हाउस में शिफ्ट किया गया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले साल पांच अगस्त को आई आपदा के बाद भी हर्षिल की सुरक्षा के लिए स्थायी व्यवस्था नहीं हो पाई। ग्रामीणों को डर है कि अगर समय पर सुरक्षा कार्य नहीं हुए तो उनके घर, आजीविका और सेब के बगीचे खतरे में आ सकते हैं।

भटवाड़ी तहसीलदार अर्पिता गड़खाल के अनुसार आठ भवन खाली कराए जा चुके हैं। इसके अलावा कुछ अन्य भवनों की भी पहचान की गई है और उन्हें खाली कराने के लिए नोटिस दिए जा रहे हैं।

पिछले वर्ष खीरगंगा और तेलगाड़ में आई बाढ़ से धराली और हर्षिल क्षेत्र में भारी नुकसान हुआ था। धराली आपदा में सात लोगों की मौत की पुष्टि हुई थी, जबकि 68 लोग लापता बताए गए थे। हर्षिल आर्मी कैंप के नौ जवान भी लापता हुए थे, जिनमें से दो के शव बाद में बरामद किए गए।

उस आपदा के दौरान हर्षिल और धराली के बीच भागीरथी का बहाव प्रभावित हुआ था और हाईवे के पास पानी जमा होने से गंगोत्री हाईवे का बड़ा हिस्सा कई दिनों तक डूबा रहा। अब एक बार फिर भागीरथी के कटाव ने हर्षिल क्षेत्र के लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

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