बदरीनाथ धाम में 1100 रुपये VIP दर्शन शुल्क पर विवाद, बीकेटीसी उपाध्यक्ष ने मंजूरी पर उठाए सवाल

विवाद केवल 1100 रुपये की शुल्क व्यवस्था तक सीमित नहीं है। जानिए, समिति की मंजूरी, धनराशि के रिकॉर्ड और मंदिर प्रबंधन की पारदर्शिता को लेकर कौन-कौन से सवाल उठ रहे हैं और आगे क्या हो सकता है।
Devotees entering the main entrance of Badrinath Dham in Chamoli district during the Char Dham Yatra.

चमोली, 9 जुलाई। बदरीनाथ धाम में वीआईपी दर्शन के लिए 1100 रुपये शुल्क लिए जाने को लेकर विवाद सामने आया है। आरोप है कि बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति यानी बीकेटीसी के प्रस्ताव के बिना श्रद्धालुओं से प्रति व्यक्ति 1100 रुपये लेकर विशेष दर्शन कराए गए। मामला सामने आने के बाद अब इस व्यवस्था की वैधता और एकत्र हुई धनराशि के उपयोग को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

मई और जून में बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। इसी दौरान कुछ श्रद्धालुओं को शुल्क लेकर वीआईपी दर्शन कराए जाने का आरोप है। बताया जा रहा है कि जून के अंतिम सप्ताह से यह व्यवस्था शुल्क लेकर संचालित की गई।

बीकेटीसी उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती का कहना है कि बीकेटीसी एक्ट के तहत किसी भी शुल्क को लागू करने के लिए समिति की मंजूरी आवश्यक है। उनका कहना है कि वीआईपी दर्शन पर शुल्क लगाने संबंधी कोई प्रस्ताव समिति की बैठक में पारित नहीं हुआ था। समिति के वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि बिना बोर्ड की मंजूरी कोई शुल्क वसूलना एक्ट की भावना के विपरीत माना जाएगा।

विवाद में वैयक्तिक सहायक प्रमोद नौटियाल का नाम भी सामने आया है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि प्रोटोकॉल व्यवस्था संभालने के दौरान शुल्क आधारित वीआईपी दर्शन व्यवस्था लागू कराई गई। मामले की शिकायत के बाद अब इस राशि के ऑडिट की बात कही जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कुल कितनी धनराशि एकत्र हुई और उसका उपयोग किस उद्देश्य में किया गया।

बीकेटीसी के सीईओ सोहन सिंह रांगड़ ने इस मामले में अपना पक्ष रखा है। उन्होंने कहा कि बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं की संख्या अधिक होने के कारण 1100 रुपये में दर्शन कराने की तात्कालिक व्यवस्था की गई थी। उनके अनुसार, इस व्यवस्था के तहत रसीद दी जाती थी और धनराशि का पूरा रिकॉर्ड समिति के पास है।

बदरीनाथ धाम चारधाम यात्रा का प्रमुख तीर्थस्थल है। मई और जून में यहां श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने पर दर्शन व्यवस्था को संभालना प्रशासन और मंदिर समिति के लिए चुनौती बन जाता है। हालांकि, शुल्क आधारित दर्शन व्यवस्था को लेकर अब समिति की मंजूरी, पारदर्शिता और नियमों के पालन पर सवाल उठ रहे हैं।

फिलहाल यह मामला श्रद्धालुओं की आस्था और मंदिर प्रबंधन की पारदर्शिता से जुड़ा माना जा रहा है। अब नजर इस बात पर है कि शुल्क वसूली से जुड़े रिकॉर्ड, रसीदें और धनराशि के उपयोग को लेकर समिति की ओर से आगे क्या स्थिति स्पष्ट की जाती है।

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