2018 की बाढ़ में बहा पुल अब तक नहीं बना, बागेश्वर के बच्चे ट्रॉली से रामगंगा पार कर पहुंच रहे स्कूल

पुल न होने की वजह से यह सिर्फ स्कूल जाने का रास्ता नहीं, बल्कि सीमावर्ती गांवों के लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। जानिए, मानसून में ट्रॉली पर निर्भर यह सफर क्यों बच्चों और स्थानीय परिवारों के लिए सबसे बड़ी चिंता बना हुआ है।
Schoolchildren and a guardian crossing the Ramganga River in a manually operated trolley after the bridge was washed away in Bageshwar.

बागेश्वर, 9 जुलाई। बागेश्वर जिले में 2018 की बाढ़ में बहा पुल अब तक नहीं बन पाया है। इसके कारण 100 से ज्यादा स्कूली बच्चे आज भी रामगंगा नदी पार करने के लिए हाथ से चलने वाली ट्रॉली पर निर्भर हैं। मानसून के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने से यह आवाजाही और जोखिम भरी हो जाती है।

मामला बागेश्वर जिले के भकुना और आसपास के गांवों से जुड़ा है। यहां के बच्चे पिथौरागढ़ जिले के नाचनी क्षेत्र के स्कूलों में पढ़ने जाते हैं। स्कूल पहुंचने के लिए बच्चों को पहले अपने गांवों से करीब दो किलोमीटर पैदल चलकर नदी किनारे आना पड़ता है। इसके बाद परिजन उन्हें ट्रॉली में बैठाकर रामगंगा नदी पार कराते हैं।

ग्रामीणों के अनुसार, 2018 की अतिवृष्टि में भकुना से नाचनी बाजार को जोड़ने वाला पुल बह गया था। पुल टूटने के बाद स्थायी वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो सकी। सर्दियों में जब नदी का जलस्तर कम होता है, तब ग्रामीण अस्थायी लकड़ी का पुल बना लेते हैं, लेकिन बरसात शुरू होते ही यह रास्ता बंद हो जाता है और ट्रॉली ही एकमात्र सहारा बनती है।

नाचनी क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता सुंदर सिंह बथ्याल के अनुसार, ट्रॉली को हाथ से खींचना पड़ता है और मौके पर लोक निर्माण विभाग का कोई कर्मचारी नियमित रूप से तैनात नहीं रहता। उन्होंने दावा किया कि पिछले आठ वर्षों में ट्रॉली से जुड़े हादसों में दो लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि छह लोग घायल हुए हैं।

भकुना गांव के निवासी दीवान सिंह कार्की ने बताया कि उनके दो बच्चे जीआईसी नाचनी में पढ़ते हैं। मानसून में नदी का जलस्तर बढ़ने पर बच्चों को अकेले ट्रॉली से भेजना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में परिजनों को बच्चों के साथ नदी किनारे तक जाना पड़ता है, ताकि उन्हें सुरक्षित तरीके से ट्रॉली में बैठाया और उतारा जा सके।

खेती गांव के मोहन सिंह की बेटी ज्ञानदीप पब्लिक स्कूल, नाचनी में पढ़ती है। उनका कहना है कि हर साल बरसात के मौसम में परिवारों को बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है। ग्रामीण लंबे समय से पुल निर्माण को प्राथमिकता देने की मांग कर रहे हैं, ताकि बच्चों और स्थानीय लोगों को जोखिम भरे सफर से राहत मिल सके।

लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस स्थान पर 110 मीटर स्पैन के पुल के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की गई है। विभाग का कहना है कि प्रस्ताव स्वीकृति के इंतजार में है और मंजूरी मिलने के बाद पुल निर्माण को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाएगा।

फिलहाल पुल न बनने से बागेश्वर और पिथौरागढ़ के सीमावर्ती गांवों के लोगों को स्कूल, बाजार और रोजमर्रा की आवाजाही के लिए ट्रॉली पर निर्भर रहना पड़ रहा है। मानसून के दिनों में रामगंगा का तेज बहाव इस परेशानी को और गंभीर बना देता है।

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