देहरादून, 26 अगस्त। देहरादून में H1N1 के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। मंगलवार को जांच में नौ और मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हुई। इसके बाद अगस्त में देहरादून के अस्पतालों में सामने आए H1N1 संक्रमित मरीजों की संख्या 49 हो गई है। बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी और निजी अस्पतालों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार को 15 नमूनों की जांच की गई, जिनमें नौ की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। अगस्त में अब तक H1N1 की जांच के लिए 118 नमूने लिए गए हैं और इनमें 49 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई है।
इन 49 संक्रमित मरीजों में 34 देहरादून जिले के रहने वाले हैं, जबकि 15 मरीज अन्य जिलों या स्थानों से इलाज के लिए देहरादून पहुंचे हैं। फिलहाल 10 संक्रमित मरीज अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं और उनका उपचार किया जा रहा है।
इस दौरान H1N1 संक्रमित पांच मरीजों की मौत भी हुई है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इन मरीजों को H1N1 के साथ दूसरी गंभीर बीमारियां भी थीं। इसलिए इन मौतों को सीधे केवल H1N1 संक्रमण से हुई मौत के रूप में नहीं देखा जा रहा है।
मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को आइसोलेशन और इलाज से जुड़ी व्यवस्थाएं तैयार रखने को कहा है। दून अस्पताल और कोरोनेशन अस्पताल में H1N1 मरीजों के लिए 10-10 बेड की व्यवस्था की गई है। अस्पतालों को जरूरी दवाओं और अन्य उपचार सुविधाओं की उपलब्धता बनाए रखने के भी निर्देश दिए गए हैं।
सरकारी और निजी अस्पतालों से H1N1 के संदिग्ध और पुष्टि वाले मामलों की नियमित जानकारी स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध कराने को कहा गया है। इसके साथ ही संक्रमण नियंत्रण के निर्धारित नियमों का पालन करने और जरूरत पड़ने पर मरीजों को समय पर आइसोलेट करने के निर्देश दिए गए हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी स्पष्ट किया है कि देश में किसी नए या असामान्य H1N1 स्ट्रेन का प्रमाण नहीं मिला है। मौजूदा मामले मौसमी इन्फ्लूएंजा के पैटर्न के अनुरूप बताए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से बुखार, खांसी, गले में खराश या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेने और संक्रमण से बचाव के लिए जरूरी सावधानियां बरतने की अपील की है।
स्वास्थ्य विभाग ने खासतौर पर बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी है। ऐसे लोगों में संक्रमण के गंभीर होने का जोखिम अधिक हो सकता है, इसलिए बुखार, खांसी या सांस लेने में परेशानी होने पर जांच और इलाज में देरी न करने को कहा गया है।
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