उत्तराखंड में बिजली लाइन या उपकरण तोड़ना पड़ेगा महंगा, ₹1 लाख तक जुर्माना; नियमों में हुए ये बड़े बदलाव

बिजली से जुड़े अलग-अलग उल्लंघनों के लिए अब कार्रवाई और आर्थिक दंड के प्रावधान अलग-अलग होंगे। विद्युत उपकरणों को नुकसान पहुंचाने से लेकर नियामक आयोग के आदेशों की अनदेखी तक, संशोधित धाराओं में जुर्माने की सीमा बदली गई है और कुछ मामलों में कंपाउंडिंग का दायरा भी बढ़ाया गया है।
Electrical distribution lines, utility poles and power equipment along a road in Uttarakhand.

देहरादून, 2 सितंबर। उत्तराखंड में बिजली लाइन, उपकरण और विद्युत आपूर्ति से जुड़ी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना अब ज्यादा महंगा पड़ सकता है। जन विश्वास (संशोधन प्रावधान) अधिनियम, 2026 के तहत बिजली कानून में किए गए बदलावों के बाद कई मामलों में आर्थिक दंड की सीमा बढ़ा दी गई है। संशोधित प्रावधान राज्य में भी लागू हैं।

विद्युत अधिनियम की धारा 139 के तहत बिजली आपूर्ति से जुड़ी सामग्री या उपकरण को लापरवाही से तोड़ने अथवा नुकसान पहुंचाने पर अब 5,000 रुपये से एक लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। पहले ऐसे मामलों में अधिकतम जुर्माने की सीमा 10 हजार रुपये थी।

इसके अलावा जानबूझकर बिजली लाइन या विद्युत कार्यों को नुकसान पहुंचाने के मामलों में भी कार्रवाई सख्त की गई है। धारा 140 के तहत ऐसे मामलों में 5,000 रुपये से एक लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

बिजली चोरी के मामलों को इससे अलग रखा गया है। बिजली चोरी से जुड़ी कार्रवाई विद्युत अधिनियम की धारा 135 के तहत होती है। नए बदलाव में बिजली चोरी पर सीधे एक लाख रुपये का तय जुर्माना नहीं किया गया है, लेकिन इससे जुड़े मामलों में समझौते की प्रक्रिया के प्रावधानों में बदलाव किया गया है।

मीटर से छेड़छाड़ या बिजली से जुड़े उपकरणों में अवैध हस्तक्षेप के मामले धारा 138 के दायरे में आते हैं। संशोधन के बाद धारा 135 के बिजली चोरी मामलों के साथ धारा 138 और धारा 140 के कुछ मामलों को भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत कंपाउंडिंग यानी तय राशि देकर मामले के निस्तारण के दायरे में लाया गया है।

विद्युत नियामक आयोग के आदेश, नियम या निर्देशों का पालन नहीं करने वालों पर भी जुर्माना बढ़ाया गया है। धारा 142 के तहत ऐसे मामलों में 10 हजार रुपये से पांच लाख रुपये तक पेनल्टी लगाई जा सकती है। उल्लंघन लगातार जारी रहने पर प्रतिदिन अतिरिक्त आर्थिक दंड का भी प्रावधान है।

धारा 146 में भी बड़ा बदलाव किया गया है। कुछ मामलों में पहले मौजूद कारावास के प्रावधान को हटाकर आर्थिक जुर्माने पर जोर दिया गया है। ऐसे उल्लंघनों में 10 हजार रुपये से 10 लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। दोष सिद्ध होने के बाद भी उल्लंघन जारी रहने पर प्रतिदिन 1,000 से 50 हजार रुपये तक अतिरिक्त जुर्माना लग सकता है।

जन विश्वास अधिनियम के इन बदलावों का उद्देश्य छोटे और प्रक्रियागत उल्लंघनों में आपराधिक कार्रवाई के बजाय आर्थिक दंड की व्यवस्था को अधिक स्पष्ट करना है। वहीं विद्युत संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, नियमों की अनदेखी करने और गंभीर उल्लंघनों के मामलों में जुर्माने की सीमा बढ़ाकर कार्रवाई को सख्त किया गया है।

ऐसे में उपभोक्ताओं और बिजली व्यवस्था से जुड़े दूसरे पक्षों के लिए यह समझना जरूरी है कि बिजली चोरी, मीटर से छेड़छाड़ और विद्युत उपकरणों को नुकसान पहुंचाना अलग-अलग धाराओं के तहत आते हैं और प्रत्येक मामले में कार्रवाई तथा जुर्माने का प्रावधान अलग हो सकता है।

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