उत्तराखंड में रोपवे संचालन के नए नियम, केदारनाथ-हेमकुंड साहिब परियोजनाओं में तैनात होंगे नोडल अधिकारी

उत्तराखंड में रोपवे परियोजनाओं को लेकर अब निर्माण के साथ उनके संचालन और निगरानी की व्यवस्था को भी स्पष्ट करने पर जोर है। प्रशासनिक प्रक्रियाओं और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को लेकर लिए गए फैसले इन परियोजनाओं के आगे के काम के लिए अहम होंगे।
उत्तराखंड में रोपवे परियोजना की समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन और अधिकारी।

देहरादून, 3 सितंबर। उत्तराखंड में रोपवे परियोजनाओं के संचालन और निगरानी के लिए अब स्पष्ट नियम तय किए जाएंगे। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने ब्रिडकुल को Ropeway Regulation और Rules जल्द तैयार कर जारी करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही केदारनाथ और हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजनाओं में जिला प्रशासन और कार्यदायी संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय के लिए नोडल अधिकारी नामित किए जाएंगे।

मुख्य सचिव ने 2 सितंबर को प्रदेश में चल रही और प्रस्तावित रोपवे परियोजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने जमीन से जुड़े मामलों और दूसरी लंबित प्रक्रियाओं को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने को कहा, ताकि परियोजनाओं के काम में अनावश्यक देरी न हो।

केदारनाथ और हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजनाएं राज्य की बड़ी धार्मिक और पर्यटन परियोजनाओं में शामिल हैं। केंद्र सरकार पहले ही 12.9 किलोमीटर लंबी सोनप्रयाग-केदारनाथ रोपवे परियोजना को 4,081.28 करोड़ रुपये और 12.4 किलोमीटर लंबी गोविंदघाट-हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजना को 2,730.13 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दे चुकी है।

मुख्य सचिव ने इन दोनों परियोजनाओं में जिला प्रशासन और निर्माण एजेंसियों के बीच लगातार समन्वय बनाए रखने के लिए नोडल अधिकारी तय करने के निर्देश दिए हैं। नोडल अधिकारी किसी परियोजना के लिए अलग-अलग विभागों और एजेंसियों के बीच मुख्य संपर्क अधिकारी के रूप में काम करता है। वह जमीन, अनुमति और दूसरी प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सामने आने वाले मामलों को संबंधित विभाग तक पहुंचाने और उनके समाधान के लिए तालमेल बनाने में मदद करता है।

इस व्यवस्था से केदारनाथ और हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजनाओं में किसी मामले के लिए अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय करने के बजाय एक तय अधिकारी के माध्यम से प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी। इसका उद्देश्य लंबित मामलों को समय पर सुलझाना और परियोजनाओं के काम में होने वाली प्रशासनिक देरी को कम करना है।

सभी रोपवे परियोजनाओं में पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था शामिल करने को भी कहा गया है। रोपवे स्टेशन तक पहुंचने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों के वाहनों के लिए पर्याप्त जगह रखने पर जोर दिया गया है, ताकि आसपास यातायात का दबाव न बढ़े।

बैठक में रानीबाग-ज्योलीकोट-हनुमानगढ़ी-कैंचीधाम और रानीबाग-भीमताल-भवाली रोपवे परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने नेशनल हाईवेज लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड और उत्तराखंड मेट्रो रेल, अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर एंड बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन को आपसी तालमेल से आगे की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए।

उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन से जुड़ी परियोजनाओं में फाइनल अप्रूवल, फाइनल DPR और DFC की प्रक्रिया भी जल्द पूरी करने को कहा गया है। इसका उद्देश्य परियोजनाओं को अगले चरण में ले जाने में आ रही प्रशासनिक देरी को कम करना है।

बैठक में जोशीमठ-औली-गोरसों, रैथल-बारसू, पुरकुल-मसूरी, यमुनोत्री-जानकी चट्टी, हनुमानचट्टी-पूर्णागिरि और तपोवन-कुंजपुरा रोपवे परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई।

सरकार का जोर अब केवल नई रोपवे परियोजनाएं शुरू करने पर नहीं, बल्कि उनके संचालन के लिए स्पष्ट नियम बनाने और अलग-अलग विभागों के बीच जिम्मेदारियां तय करने पर है। इससे परियोजनाओं के निर्माण और बाद के संचालन में प्रक्रिया अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

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