देहरादून में पर्यटकों के लिए विकसित होगी झील, रामपुर मंडी में तैयारी तेज; फरवरी से पर्यटकों के लिए खोलने की तैयारी

रामपुर मंडी में तैयार हो रही यह जगह पर्यटकों को झील, वेटलैंड और पक्षियों को करीब से देखने का अवसर दे सकती है। अक्टूबर से शुरू होने वाले प्रवासी पक्षियों के मौसम में यहां का अनुभव और खास हो सकता है, जबकि प्रशिक्षित नेचर गाइड क्षेत्र की प्राकृतिक विविधता को समझने में मदद करेंगी। लेकिन इसे पर्यटकों के लिए तैयार करने में अभी कौन-कौन से बदलाव बाकी हैं...
Waterbirds across a wetland with a large eagle perched on a small island surrounded by vegetation

देहरादून, 7 सितंबर। उत्तराखंड की पहली रामसर साइट आसन वेटलैंड के पास पर्यटकों के लिए एक नया आकर्षण विकसित करने की तैयारी है। रामपुर मंडी स्थित वानिकी प्रशिक्षण केंद्र परिसर में मौजूद करीब एक किलोमीटर लंबी पुरानी झील को पर्यटन और बर्ड वाचिंग के लिहाज से विकसित किया जा रहा है। इसे फरवरी में वर्ल्ड वेटलैंड डे के आसपास पर्यटकों के लिए खोलने की उम्मीद है।

चकराता वन प्रभाग झील के चारों ओर नेचर ट्रेल विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है। इसके जरिए पर्यटक झील के आसपास घूम सकेंगे और प्राकृतिक वातावरण में पक्षियों को देख सकेंगे। आसन क्षेत्र में बर्ड वाचिंग के लिए वन विभाग के दो टावर भी पहले से मौजूद हैं।

यह कोई नई झील नहीं बनाई जा रही है, बल्कि वानिकी प्रशिक्षण केंद्र परिसर में पहले से मौजूद झील को व्यवस्थित और पर्यटक अनुकूल बनाने की तैयारी है। परिसर में पक्षियों से जुड़ी जानकारी देने के लिए डिस्प्ले भी लगाए गए हैं, ताकि यहां आने वाले लोगों को स्थानीय और प्रवासी पक्षियों के बारे में जानकारी मिल सके।

पर्यटकों की सहायता के लिए वन विभाग ने बोक्सा जनजाति की छात्राओं को नेचर गाइड के रूप में प्रशिक्षण भी दिया है। ये गाइड यहां आने वाले पर्यटकों को पक्षियों, वेटलैंड और आसपास के प्राकृतिक क्षेत्र के बारे में जानकारी देंगी।

आसन वेटलैंड में प्रवासी पक्षियों के लिए मड टापू विकसित करने की भी तैयारी है। वन विभाग का उद्देश्य पक्षियों को बैठने और आराम करने के लिए बेहतर स्थान उपलब्ध कराना है। अक्टूबर से यहां बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों का आना शुरू हो जाता है।

आसन वेटलैंड में अक्टूबर से मार्च तक बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी पहुंचते हैं। अप्रैल से सितंबर के बीच स्थानीय प्रजातियां प्रमुख रूप से दिखाई देती हैं। यही वजह है कि यह क्षेत्र पक्षी प्रेमियों और प्रकृति प्रेमियों के लिए खास माना जाता है।

जनवरी 2026 में हुए Asian Waterbird Census में आसन वेटलैंड में 126 प्रजातियों के 5,806 पक्षी दर्ज किए गए थे। इनमें सुर्खाब यानी Ruddy Shelduck की संख्या सबसे अधिक रही। इसके अलावा Common Pochard, Ferruginous Duck और Pallas’s Fish Eagle जैसी प्रजातियां भी यहां दर्ज की गई थीं।

आसन वेटलैंड को 2020 में रामसर साइट का दर्जा मिला था और यह उत्तराखंड की पहली रामसर साइट है। अब पुरानी झील, नेचर ट्रेल, बर्ड वाचिंग और नेचर गाइड जैसी सुविधाएं विकसित होने से पर्यटकों के लिए यहां का अनुभव और बेहतर होने की उम्मीद है।

वन विभाग का लक्ष्य है कि झील को फरवरी में वर्ल्ड वेटलैंड डे के आसपास पर्यटकों के लिए खोला जा सके। फिलहाल इससे जुड़ी तैयारियां जारी हैं।

यह भी पढ़ें: देहरादून में स्वाइन फ्लू के 300 मामले, 29 नए मरीज मिले; बढ़ते संक्रमण पर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

यह भी पढ़ें: उत्तराखंड में मोटर वाहन नियम बदलने की तैयारी, 20 पुराने प्रावधान हटेंगे; 14 संशोधित नियमों से बदलेगी कार्रवाई