हरिद्वार अर्धकुंभ 2027: स्टेशन से शहर तक बदलेगी तस्वीर, नया गेटवे और 10 प्रमुख स्नान रहेंगे खास

अर्धकुंभ के दौरान रेलवे स्टेशन सिर्फ यात्रियों के आने-जाने का स्थान नहीं रहेगा, बल्कि भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं की आवाजाही को चरणबद्ध करने में भी अहम भूमिका निभाएगा। प्लेटफॉर्म क्षमता बढ़ाने और आसपास के स्टेशनों पर दबाव बांटने की तैयारियों के साथ अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रस्तावित व्यवस्थाएं प्रमुख स्नान पर्वों की भारी भीड़ को कितना संभाल पाती हैं।
Devotees gather at a Haridwar ghat during a major Hindu religious occasion.

हरिद्वार, 4 अक्टूबर 2026। अर्धकुंभ 2027 में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के हरिद्वार पहुंचने की संभावना को देखते हुए रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधाओं और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था मजबूत की जा रही है। स्टेशन को धर्मनगरी के प्रमुख प्रवेश द्वार के रूप में विकसित करने की तैयारी है। इसके तहत यात्रियों के ठहरने, सुरक्षा, टिकट व्यवस्था और स्टेशन के सौंदर्यीकरण पर काम किया जाएगा।

अर्धकुंभ के प्रमुख स्नान पर्वों पर स्टेशन के अंदर एक साथ ज्यादा भीड़ न हो, इसके लिए करीब 10 हजार यात्रियों की क्षमता वाला होल्डिंग एरिया विकसित करने की तैयारी है। जरूरत पड़ने पर यात्रियों को यहां रोककर चरणबद्ध तरीके से प्लेटफॉर्म की ओर भेजा जाएगा।

स्टेशन पर अतिरिक्त टिकट काउंटर, बेहतर अनाउंसमेंट सिस्टम, पेयजल, शौचालय और यात्रियों के लिए दूसरी जरूरी सुविधाओं को भी बढ़ाया जाएगा। CCTV कैमरों से निगरानी, सुरक्षा व्यवस्था और आपात स्थिति में मेडिकल सहायता को भी मजबूत करने की योजना है।

रेलवे स्टेशन पर प्लेटफॉर्म और ट्रेन संचालन से जुड़ी क्षमता बढ़ाने पर भी काम किया जा रहा है। जागरण की रिपोर्ट के अनुसार स्टेशन पर प्लेटफॉर्म की संख्या 10 तक करने की तैयारी है, ताकि अर्धकुंभ के दौरान अतिरिक्त ट्रेनों और यात्रियों की भीड़ को बेहतर तरीके से संभाला जा सके।

हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं को स्टेशन पर ही उत्तराखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान की झलक दिखाने की भी योजना है। इसके लिए विशेष लाइटिंग, डिजिटल स्क्रीन और स्टेशन परिसर के सौंदर्यीकरण पर काम किया जाएगा।

तैयारियां केवल हरिद्वार रेलवे स्टेशन तक सीमित नहीं रहेंगी। आसपास के दूसरे रेलवे स्टेशनों पर भी यात्री सुविधाएं और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था मजबूत की जा रही है, ताकि प्रमुख स्नान पर्वों के दौरान यात्रियों का दबाव अलग-अलग स्टेशनों के जरिए संभाला जा सके।

अपर मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती के अनुसार रेलवे और मेला प्रशासन के अधिकारियों के बीच तैयारियों को लेकर कई दौर की बैठक हो चुकी है। निर्माण कार्यों की निगरानी के साथ रेलवे को जमीन और दूसरे जरूरी कार्यों से जुड़ी समस्याओं के समाधान में मेला प्रशासन की ओर से सहयोग दिया जा रहा है।

अर्धकुंभ 2027 के दौरान कुल 10 प्रमुख स्नान पर्व निर्धारित किए गए हैं। इनमें चार अमृत स्नान भी शामिल हैं। पहला अमृत स्नान 6 मार्च को महाशिवरात्रि, दूसरा 8 मार्च को सोमवती अमावस्या, तीसरा 14 अप्रैल को मेष संक्रांति/बैसाखी और चौथा अमृत स्नान 20 अप्रैल को चैत्र पूर्णिमा पर होगा।

अर्धकुंभ की तैयारियों में रेलवे स्टेशन को खास महत्व दिया जा रहा है, क्योंकि बड़ी संख्या में श्रद्धालु रेल मार्ग से हरिद्वार पहुंचेंगे। ऐसे में स्टेशन पर यात्रियों की आवाजाही को आसान बनाने और भीड़ को नियंत्रित रखने के लिए पहले से व्यवस्थाएं तैयार की जा रही हैं।

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