देहरादून में 16 करोड़ का नंदा की चौकी पुल 17 दिन में धंसा, यातायात प्रभावित

पुल का बंद होना केवल एक निर्माण परियोजना का मुद्दा नहीं है। इस मार्ग पर रोज़ाना सफर करने वाले लोगों की आवाजाही, वैकल्पिक रास्तों पर बढ़ने वाला दबाव और निर्माण गुणवत्ता से जुड़े सवाल अब सबसे बड़ी चिंता बन सकते हैं। तकनीकी जांच से किन कारणों का खुलासा हो सकता है और आगे क्या कदम उठाए जाएंगे, इसकी पूरी जानकारी आगे पढ़ें।
A section of the newly reconstructed Nanda Ki Chowki bridge approach road in Dehradun has subsided after heavy rainfall, with traffic halted and vehicles diverted.

देहरादून, 28 जुलाई। देहरादून-पांवटा साहिब पुराने राजमार्ग पर नंदा की चौकी के पास टौंस नदी पर करीब 16 करोड़ रुपये की लागत से पुनर्निर्मित पुल का एक हिस्सा तेज बारिश के बाद धंस गया। पुल को यातायात के लिए खोले हुए केवल 17 दिन हुए थे। सड़क पर गहरा गड्ढा बनने के बाद सुरक्षा को देखते हुए वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है।

यह पुल देहरादून से प्रेमनगर और विकासनगर की ओर जाने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण मार्ग का हिस्सा है। पुल बंद होने से इस रास्ते से गुजरने वाले वाहन चालकों और स्थानीय लोगों की परेशानी एक बार फिर बढ़ गई है। यातायात रोकने के बाद वाहनों को दूसरे मार्गों से भेजा जा रहा है।

इससे पहले 11 जुलाई की रात तेज बारिश के कारण टौंस नदी का जलस्तर बढ़ गया था। नदी पर ह्यूम पाइप के सहारे बनाई गई अस्थायी पुलिया क्षतिग्रस्त होने के बाद लोक निर्माण विभाग ने नए मुख्य पुल का बचा हुआ काम पूरा किया और 12 जुलाई से उस पर वाहनों की आवाजाही शुरू कराई थी।

नंदा की चौकी का पुराना पुल सितंबर 2025 में भारी बारिश और टौंस नदी के उफान के दौरान क्षतिग्रस्त हो गया था। पुल की एबटमेंट वॉल और स्लैब को नुकसान पहुंचने के बाद यहां अस्थायी मार्ग तैयार किया गया था। पुराने पुल के बंद होने से देहरादून और विकासनगर के बीच यातायात पर भी असर पड़ा था।

इसके बाद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से मिली करीब 16 करोड़ रुपये की धनराशि से लोक निर्माण विभाग ने पुल का पुनर्निर्माण कराया। मानसून के दौरान इस पुल को सुरक्षित आवाजाही के विकल्प के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन खोले जाने के कुछ ही दिनों बाद धंसाव सामने आने से निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं।

फिलहाल पुल का हिस्सा किस कारण धंसा और इसे ठीक करने में कितना समय लगेगा, इसकी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। संबंधित विभाग से पुल की तकनीकी जांच और जल्द मरम्मत की उम्मीद की जा रही है। तब तक इस मार्ग से गुजरने वाले लोगों को वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ेगा।

पुल बंद होने से पुराने देहरादून-पांवटा साहिब मार्ग पर यातायात का दबाव वैकल्पिक रास्तों पर बढ़ सकता है। प्रेमनगर, सेलाकुई और विकासनगर की ओर जाने वाले वाहन चालकों को लंबा चक्कर लगाना पड़ सकता है। बारिश के दौरान वैकल्पिक मार्गों पर भी भूस्खलन और जलभराव की आशंका को देखते हुए लोगों को सावधानी से यात्रा करने की सलाह दी गई है।

अब लोक निर्माण विभाग के सामने पुल के धंसे हिस्से की तकनीकी जांच, मरम्मत और दोबारा सुरक्षित यातायात शुरू कराने की चुनौती है। करीब 16 करोड़ रुपये खर्च होने और पुल खुलने के 17 दिन बाद ही धंसाव आने से यह भी सवाल उठ रहा है कि निर्माण के दौरान गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर की गई थी। विभाग की रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि खामी निर्माण में थी या तेज बारिश और नदी के दबाव से पुल को नुकसान पहुंचा।

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