देहरादून: बालावाला-गुलरघाटी में IT पार्क बनाने की तैयारी, हजारों युवाओं के लिए रोजगार की उम्मीद

बालावाला की करीब 35.7 एकड़ पुरानी औद्योगिक जमीन पर नए निवेश और रोजगार की संभावनाएं तलाश की जा रही हैं। परियोजना आगे बढ़ने से पहले केंद्र से जमीन हस्तांतरण और आवश्यक मंजूरियां मिलना जरूरी है।
Conceptual view of the proposed IT park in Balawala-Gularghati, Dehradun, featuring modern glass office buildings, young professionals, landscaped walkways and green foothills.

देहरादून, 25 अक्टूबर 2026: देहरादून के बालावाला क्षेत्र में गुलरघाटी स्थित बंगाल इम्युनिटी की पुरानी घोड़ा फैक्टरी की करीब 35.7 एकड़ जमीन को नए उपयोग में लाने की तैयारी है। राज्य सरकार इस जमीन पर IT या बिजनेस पार्क विकसित करना चाहती है। जमीन उत्तराखंड सरकार को हस्तांतरित करने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस संबंध में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखा है। इसके बाद औषध विभाग को प्रस्ताव पर आगे की कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

फिलहाल परियोजना प्रस्ताव और जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया में है। अभी जमीन राज्य सरकार को हस्तांतरित नहीं हुई है और न ही IT या बिजनेस पार्क के निर्माण को अंतिम मंजूरी मिली है। जमीन हस्तांतरण और जरूरी मंजूरियां मिलने के बाद ही परियोजना का अगला चरण शुरू होगा।

गुलरघाटी स्थित यह परिसर बंगाल इम्युनिटी लिमिटेड की पुरानी देहरादून फैक्टरी का हिस्सा है। कंपनी दवाओं, सीरम, वैक्सीन और अन्य जैविक उत्पादों के निर्माण से जुड़ी रही है। वर्ष 1984 में कंपनी के उपक्रम केंद्र सरकार के नियंत्रण में चले गए थे। बाद के वर्षों में कंपनी बंद हो गई और इसकी संपत्तियों से जुड़े मामले न्यायिक प्रक्रिया में पहुंचे।

NCLT के रिकॉर्ड में देहरादून स्थित फैक्टरी की जमीन करीब 35.79 एकड़ दर्ज है। लंबे समय से बंद पड़े इस परिसर को अब राज्य सरकार नए औद्योगिक और व्यावसायिक उपयोग में लाने की योजना बना रही है।

राज्य सरकार को उम्मीद है कि यहां IT या बिजनेस पार्क बनने से निवेश के नए अवसर तैयार होंगे और स्थानीय युवाओं के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। हालांकि, रोजगार की वास्तविक संख्या और यहां आने वाली कंपनियों का स्वरूप आगे की मंजूरियों के बाद ही स्पष्ट होगा।

परियोजना की कनेक्टिविटी बेहतर करने के लिए सोंग नदी पर प्रस्तावित लच्छीवाला-थानो फोरलेन एलिवेटेड मार्ग को भी इस क्षेत्र से जोड़ने की योजना बताई गई है।

फिलहाल सबसे अहम प्रक्रिया जमीन के हस्तांतरण की है। इसके पूरा होने के बाद ही परियोजना की लागत, निर्माण की समयसीमा और पार्क के अंतिम स्वरूप को लेकर स्थिति साफ होगी।

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