उत्तराखंड में पोल्ट्री फार्म खोलने पर 63 लाख रुपये तक सब्सिडी, आवेदन से पहले जान लें शर्तें

व्यावसायिक मुर्गीपालन में निवेश की योजना बना रहे उद्यमियों के लिए जमीन, बैंक सहमति, पक्षियों की क्षमता और परियोजना का क्षेत्र महत्वपूर्ण हैं। नीति के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता इन्हीं शर्तों और उपलब्ध बजट पर निर्भर करेगी।
Commercial poultry farm in Uttarakhand showing mature chickens, feeding equipment and a farm entrepreneur inside a realistic poultry shed.

देहरादून, 26 अक्टूबर 2026: उत्तराखंड में व्यावसायिक पोल्ट्री फार्म शुरू करने की योजना बना रहे उद्यमियों को कुक्कुट विकास नीति-2025 के तहत आर्थिक सहायता का प्रावधान है। नीति के अनुसार मैदानी क्षेत्रों में परियोजना लागत का 30% और पर्वतीय क्षेत्रों में 40% तक अनुदान दिया जा सकता है। कुछ श्रेणियों में यह सहायता अधिकतम 63 लाख रुपये तक पहुंचती है।

मैदानी क्षेत्र में 10 हजार पक्षियों की क्षमता वाले ब्रायलर पैरेंट फार्म के लिए अधिकतम परियोजना लागत 2.10 करोड़ रुपये तय की गई है। इस पर अधिकतम 63 लाख रुपये तक अनुदान मिल सकता है। वहीं पर्वतीय क्षेत्र में 5 हजार पक्षियों वाले ब्रायलर पैरेंट फार्म के लिए 1.40 करोड़ रुपये की परियोजना लागत पर अधिकतम 56 लाख रुपये तक सहायता का प्रावधान है।

व्यावसायिक लेयर फार्म के लिए भी अलग सहायता तय की गई है। मैदानी क्षेत्र में 30 हजार पक्षियों की क्षमता वाले लेयर फार्म की अधिकतम परियोजना लागत 1.80 करोड़ रुपये है, जिस पर अधिकतम 54 लाख रुपये तक अनुदान मिल सकता है। पर्वतीय क्षेत्र में 15 हजार पक्षियों वाले लेयर फार्म के लिए अधिकतम 48 लाख रुपये तक सहायता का प्रावधान है।

योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक के पास उत्तराखंड में अपनी जमीन होनी चाहिए या कम से कम 10 साल का पंजीकृत पट्टा होना जरूरी है। जमीन विवादित नहीं होनी चाहिए और बैंक का सहमति पत्र भी देना होगा।

नीति में उत्तराखंड का मूल निवासी होना अनिवार्य नहीं रखा गया है। भारतीय नागरिक, एनआरआई, व्यक्तिगत उद्यमी, साझेदारी फर्म, कंपनियां और स्टार्टअप तय शर्तों के तहत आवेदन कर सकते हैं।

वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2029-30 के बीच राज्य में कुल 54 पोल्ट्री इकाइयां स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें 26 इकाइयां मैदानी क्षेत्रों और 28 पर्वतीय क्षेत्रों में प्रस्तावित हैं। परियोजनाओं को पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर मंजूरी दी जाएगी और अनुदान बजट की उपलब्धता पर निर्भर करेगा।

निर्धारित क्षमता से छोटी पोल्ट्री इकाई लगाने वाले उद्यमी MSME नीति के तहत उपलब्ध लाभ ले सकते हैं। उन्नत तकनीक अपनाने वाली इकाइयों के लिए नवाचार प्रोत्साहन के रूप में अधिकतम एक लाख रुपये की सहायता का भी प्रावधान है।

यह योजना नई नहीं है, बल्कि कुक्कुट विकास नीति-2025 का हिस्सा है। मौजूदा समय में इसकी सब्सिडी संरचना और पात्रता को लेकर जानकारी फिर से सामने आई है। 63 लाख रुपये की सहायता हर पोल्ट्री फार्म को नहीं मिलेगी; वास्तविक अनुदान फार्म के प्रकार, क्षेत्र, स्वीकृत परियोजना लागत और नीति की शर्तों पर निर्भर करेगा।

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