देहरादून, 12 अगस्त। उत्तराखंड में सेब, कीवी और ड्रैगन फ्रूट की खेती बढ़ाने के साथ अब किसानों को बाजार, भंडारण और प्रोसेसिंग की सुविधाओं से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार क्लस्टर आधारित खेती को आगे बढ़ाने की तैयारी में है, ताकि उत्पादन बढ़ने के साथ किसानों को फसल सुरक्षित रखने और बेहतर बाजार तक पहुंचने की सुविधा भी मिल सके।
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में सेब, कीवी और ड्रैगन फ्रूट समेत फल उत्पादन से जुड़ी योजनाओं की समीक्षा की गई। इस दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जिलाधिकारियों से उनके क्षेत्रों में चल रही योजनाओं, उत्पादन की स्थिति और किसानों के सामने आ रही समस्याओं की जानकारी ली गई।
बैठक में सेब, कीवी और ड्रैगन फ्रूट की क्लस्टर आधारित खेती को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया। जिलों को मिशन की निर्धारित अवधि के लिए फल उत्पादन का क्षेत्र और उत्पादकता बढ़ाने के स्पष्ट लक्ष्य तय करने को कहा गया है। हालांकि अभी किसी जिले के लिए क्षेत्रफल या उत्पादन का निश्चित लक्ष्य सार्वजनिक नहीं किया गया है।
नए क्षेत्रों को फल उत्पादन से जोड़ने और कम उत्पादकता वाले पुराने क्षेत्रों में हाई डेंसिटी किस्मों को बढ़ावा देने के निर्देश भी दिए गए। इसके साथ ही गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने और कृषि विज्ञान केंद्रों की भूमिका बढ़ाने पर जोर दिया गया।
मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों से किसानों के बीच जाकर सीधे फीडबैक लेने को कहा है। किसानों को खेती में किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है और मौजूदा योजनाओं में क्या बदलाव जरूरी हैं, इसकी जानकारी शासन तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। स्थानीय जरूरतों के अनुसार किसी योजना में बदलाव की जरूरत होने पर जिलाधिकारी उसका प्रस्ताव भी भेज सकेंगे।
सरकार का फोकस केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा। किसानों को बेहतर बाजार और फसल सुरक्षित रखने की सुविधा देने के लिए कोल्ड स्टोरेज चेन, परिवहन, रोपवे, मार्केटिंग और प्रोसेसिंग यूनिट विकसित करने पर भी जोर दिया गया है। जिलाधिकारियों से इनसे जुड़े प्रोजेक्ट अपनी कार्ययोजना में शामिल करने को कहा गया है।
नए बाग लगाने के बाद फल उत्पादन शुरू होने में समय लगता है। ऐसे में किसानों की आय प्रभावित न हो, इसके लिए बीच की अवधि में दूसरी फसलें उगाने यानी इंटरक्रॉपिंग को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इससे नए फलदार पौधों के उत्पादन में आने तक किसानों को दूसरी फसलों से आमदनी मिल सकेगी।
पॉलीहाउस स्थापना के लिए प्रत्येक जिले में तीन-तीन वेंडर सूचीबद्ध किए गए हैं। अधिकारियों को किसानों को योजनाओं का लाभ लेने में सहयोग देने और प्रक्रिया से जुड़ी दिक्कतों को दूर करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
बैठक में प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव शैलेश बगौली, एसएन पांडेय, राजेंद्र कुमार, गढ़वाल आयुक्त आनंद स्वरूप, कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत समेत जिलाधिकारी और संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
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