उत्तराखंड में वृद्धावस्था पेंशन प्रक्रिया सरल करने की तैयारी, 9.80 लाख लाभार्थियों को ₹145.42 करोड़ जारी

सरकार पेंशन व्यवस्था को ऐसी प्रणाली में बदलने की तैयारी कर रही है, जिसमें पात्र नागरिकों तक लाभ समय पर और कम औपचारिकताओं के साथ पहुंच सके। नई व्यवस्था कैसे काम करेगी और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को लेकर बैठक में क्या अहम फैसले हुए, जानिए।
Chief Minister Pushkar Singh Dhami attends a Social Welfare Department review meeting in Dehradun.

देहरादून, 8 जुलाई। उत्तराखंड में वृद्धावस्था पेंशन प्रक्रिया को अधिक सरल और तकनीक आधारित बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। समाज कल्याण विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए, जिससे पात्र नागरिकों को 60 वर्ष की आयु पूरी होते ही वृद्धावस्था पेंशन के दायरे में लाया जा सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज कल्याण विभाग की योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक समय पर और पारदर्शी तरीके से पहुंचना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को लाभार्थी-केंद्रित व्यवस्था तैयार करने के निर्देश दिए, ताकि जरूरतमंद लोगों को सरकारी योजनाओं के लिए अनावश्यक प्रक्रियाओं से न गुजरना पड़े।

बैठक के दौरान जून 2026 की सामाजिक सुरक्षा पेंशन भी जारी की गई। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से 9,80,950 लाभार्थियों के बैंक खातों में कुल ₹145.42 करोड़ की राशि भेजी गई। इसमें केंद्र सरकार का अंश ₹7.02 करोड़ और राज्य सरकार का अंश ₹138.40 करोड़ बताया गया है।

वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत 6,11,245 लाभार्थियों को ₹91.69 करोड़ जारी किए गए। इसके अलावा विधवा, दिव्यांग, किसान, परित्यक्ता, भरण-पोषण, तीलू रौतेली और बौना पेंशन योजना के लाभार्थियों को भी जून माह की पेंशन राशि डीबीटी के माध्यम से भेजी गई।

मुख्यमंत्री ने समाज कल्याण विभाग को भविष्य की जरूरतों के अनुसार योजनाओं का रोडमैप तैयार करने को भी कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि विभाग अगले 25 वर्षों की चुनौतियों और आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अपनी योजनाओं को आगे बढ़ाए। बैठक में वित्तीय अनुशासन, संसाधनों के प्रभावी उपयोग और योजनाओं की दीर्घकालिक स्थिरता पर भी जोर दिया गया।

समीक्षा बैठक में तकनीक आधारित सेवा वितरण और विभागीय समन्वय पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि विभागों के बीच बेहतर समन्वय से योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों तक और तेजी से पहुंचाया जा सकता है। इसके लिए ऐसी प्रणाली विकसित करने को कहा गया, जो नागरिकों के लिए प्रक्रिया को सरल बनाए और पारदर्शिता बढ़ाए।

बैठक में अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं के लिए बन रहे बाबू जगजीवन राम छात्रावासों की प्रगति की भी समीक्षा की गई। डोईवाला, देहरादून और पाइनस, नैनीताल में बालक छात्रावास तथा सोमेश्वर, अल्मोड़ा में बालिका छात्रावास के निर्माण कार्य को अक्टूबर तक पूरा करने के निर्देश दिए गए।

मुख्यमंत्री ने समाज कल्याण विभाग की योजनाओं की नियमित समीक्षा करने और प्रत्येक पात्र लाभार्थी तक समयबद्ध तरीके से लाभ पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं में तकनीक, पारदर्शिता और सरल प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाए।

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